पर्यावरण शिक्षा को प्रभावशाली बनाने के लिए तरीके एवं रणनीतियाँ(2) - Methods and Strategies to Make Environmental Education Effective

पर्यावरण शिक्षा को प्रभावशाली बनाने के लिए तरीके एवं रणनीतियाँ(2) - Methods and Strategies to Make Environmental Education Effective

 कुछ समस्या निवारण के उदाहरण


• रसायन उद्योगों से उत्पन्न वायु प्रदूषण


• ठोस अपशिष्टों का निस्तारण


• घरेलू उपयोग हेतु ऊर्जा के वैकल्पिक स्त्रोत । 


5. केस अध्ययन विधा- पर्यावरण शिक्षा शिक्षण में केस अध्ययन की एक खोजी विधा है केस अध्ययन को विशिष्ट स्थान या घटना के लिए प्रयोग किया जाता है।

घटना के बारे में जानकारी समाचार पत्रों की कहानियों, टेलीविजन कार्यक्रमों या अन्य जनसंचार माध्यमों से प्राप्त होती है। इस प्रकार की रिपोर्ट किसी परिस्थिति में पर्यावरणीय मुद्दे एवं इससे संबंधित समस्या को समझने में सहायता करती है। उदाहरण के तौर पर-


• ताजमहल के रंग का बदलना (सफेद से दूधिया होना)


• वनों के कटने से प्रदेश में हानि।


• गंगा नदी का प्रदूषित होना


6. ब्रेन स्टार्मिंग विधा- किसी विषय या मुद्दे पर सकारात्मक रुख जानने के लिए इस शिक्षण विद्या का प्रयोग किया जाता है। इस सत्र में किसी विभिन्न उपायों को प्रतिपादित किया जाता है। अंत में प्रत्येक उपाय को उसके मूल्य, लाभ-हानि एवं समय के अनुरूप आंका जाता है तथा सर्वोचित उपाय का चयन किया जाता है। उदाहरण -


• वाहन के द्वारा होने वाली प्रदूषण पर नियंत्रण |


• घरेलू ठोस अपशिष्टों का पुनः उपयोग एवं पुनः चारण


• पॉलिथीन के विकल्प।


7. परियोजनाएं एवं सर्वेक्षण - जानकारियां, तथ्य एवं विचार जानने के लिए सर्वेक्षण किया जाता है ।

सर्वेक्षण केवल समस्या की मूलभूत जानकारी ही नहीं प्रदान करता वरन् पर्यावरण को पूर्ण दृश्य भी देता है । सर्वेक्षण प्राकृतिक या सामाजिक पर्यावरण में समस्या निदान का ढंग है। यह पर्यावरण एवं इसकी समस्याओं को समझने के लिए खोजी ढंग का समर्थन करता है। यह पर्यावरण से संबंधित जानकारियों को एकत्र करती है जिनका आंकलन एवं अनुमापन करके हम अर्थपूर्ण निष्कर्ष पर आते है । इन निष्कर्षों को हम पर्यावरण समस्याओं को सुलझाने व विवादों को निपटाने में प्रयोग करते है।


8. पर्यावरण क्लब - पर्यावरण क्लब छात्रों द्वारा पर्यावरण को समझने एवं बचाव के लिए सामूहिक एवं स्वैच्छिक प्रयासों को कह सकते हैं। यह छात्रों का एक समूह है जो पर्यावरण लाभ हेतु कार्यक्रमों में भाग लेने के इच्छुक रहते है। इसके गठन का उद्देश्य बच्चों को पर्यावरण में ले जाना एवं पर्यावरण को कक्षा में लाना है। इससे बच्चों में पर्यावरण के प्रति रुचि एवं जागरुकता पैदा होती है। पोस्टर, ग्राफ, चार्ट, मानचित्र, मॉडल, श्रव्य कार्यक्रम आदि का भी उपयोग किया जाता है।