अधिग्रहण - Acquisition

अधिग्रहण - Acquisition


संविलयन की तरह इसमें दो या अधिक कंपनियाँ आपस में संयोजन नहीं करती है। अधिग्रहण के अंतर्गत, एक कंपनी दूसरी कंपनी के अंश का क्रय करती है। जिससे दूसरी कंपनी के संपत्तियों या प्रबंध पर पहली कंपनी का प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो सके। इसमें कंपनियों तथा व्यवसाय का संयोजन नहीं होता है। इसमें संबंधित कंपनियाँ, अधिग्रहण के पश्चात्, स्वतंत्र रूप से अपना कार्य संचालन करती रहती हैं। अधिग्रहर के में यह आवश्यक नहीं है कि संपूर्ण या कानूनी तौर पर नियंत्रण स्थापित कर लिया जाये।


अधिग्रहण तथा टेकओवर (takeover) को प्राय: समानार्थी माना जाता है। वास्तव में, टेकओवर अधिग्रहण का एक स्वरूप है।

एकाधिकार एवं प्रतिबंधित व्यापारिक व्यवहार अधिनियम (Monopolies and Restrictive Trade Practices Act) के अंतर्गत, यदि एक कंपनी दूसरी कंपनी के कुल मताधिकार ( Voting Rights) के 25 प्रतिशत का अधिग्रहण कर लेती है तो उसे टेकओवर माना जाता है। कंपनी अधिनियम 1956 के अंतर्गत, यदि एक कंपनी अभिदत्त पूँजी (Subscribed Capital) के 10 प्रतिशत अंशों से अधिक अंशों का अधिग्रहण कर लेती है तो उसे टेकओवर माना जाता है।


अधिग्रहण तथा टेकओवर को वैसे तो समानार्थी माना जाता है किंतु व्यवहार में टेकओवर तब माना जाता है जबकि अंशों का अधिग्रहण दूसरी कंपनी की इच्छा के विरूद्ध किया जाता है यह वास्तव में शत्रुता (hostility) को इंगित करता है इसी लिये इसे शत्रुतापूर्ण टेकओवर (hostile takeover) भी कहते हैं।