अनुकूलन , प्रशिक्षण , मतारोपण - adaptation, training, parenting

अनुकूलन , प्रशिक्षण , मतारोपण - adaptation, training, parenting

(Conditioning): अनुकूलन में बाह्य कारकों के प्रभाव से एक साधारण क्रिया उत्पन्न कर में शिक्षार्थी के व्यवहार में परिवर्तन लाया जाता है। अनुकूलन की दशा में शिक्षार्थी सीखने में पहल नहीं करता तथा अपने विचार या चिंतन को सीखने के लिए प्रयोग में नहीं लाता है। इसमें शिक्षार्थी से यह अपेक्षा कि जाती है कि वह प्रस्तुत उद्दीपन के उत्तर में उचित अनुक्रिया करे। यदि वह उचित अनुक्रिया करता है तो उसके व्यवहार को पुनर्बलित किया जाता है जिससे उद्दीपन एवं क्रिया के बीच साहचर्य स्थापित होता है तथा भविष्य में इसी प्रकार के उद्दीपन का सामना होने पर शिक्षार्थी द्वारा उद्दीपन के उत्तर में उचित अनुक्रिया के उत्पन्न होने की संभावना बढ़ जाती है। अनुकूलन में दो उद्दीपनों को आपस में जोड़कर उनके बीच साहचर्य स्थापित किया जाता है जिससे एक उद्दीपन के अनुक्रिया उत्पन्न करने की क्षमता को दूसरे उद्दीपन को हस्तांतरित कर दिया जाता है।


प्रशिक्षण: इसमें शिक्षार्थी एक प्रशिक्षु की तरह कार्य करता है जिससे यह अपेक्षा की जाती है

कि वह किसी कौशल या आचरण का अभ्यास कर उसे उसी रूप में प्रस्तुत करे जिस रूप में उसकी रचना तथा प्रस्तुति प्रशिक्षक के द्वारा की गयी है। इसके लिए प्रशिक्षक उपयुक्त नियमावली का निर्धारण करता है तथा बाह्य कारकों को नियंत्रित कर अभ्यास एवं अनुशासन द्वारा कौशल या व्यवहार को सिखाता है। इसमें प्रशिक्षु को बास्बार किसी आचरण को प्रस्तुत करने का मौका दिया जाता है तथा बार-बार उसके प्रस्तुति का पृष्ठ पोषण किया जाता है जिससे प्रशिक्षु अपने आचरण में सुधार लाकर अंततः विशेष व्यवहार कौशल पर अधिकार प्राप्त कर लेता है। प्रशिक्षण की प्रक्रिया में शिक्षार्थी सीखने के लिए अपने सूझ-बूझ का उपयोग नहीं करता तथा कोई पूछताछ नहीं करता। वह बिना किसी संशय या जिज्ञासा के अपेक्षित आचरण का अभ्यास करने लगता है।


मतारोपण: इसमें शिक्षार्थी का शिक्षक पर अंधविश्वास तथा श्रद्धा होती है। इस श्रद्धा तथा अन्धविश्वास के आधार पर वह शिक्षक द्वारा प्रस्तुत सत्य तथा तर्क को बिना किसी शंका के स्वीकार करता है। वह अपने तर्क या सूझ-बूझ को सीखने के लिए प्रयोग में नहीं लाता। वह उसी मत को अपना लेता है जो शिक्षक उस पर आरोपित करना चाहता है।