समायोजन - Adjustment

समायोजन - Adjustment


समायोजन शब्द का काफी सामान्य और प्रचालित अर्थ है। इसके अर्थ को और अच्छी तरह स्पष्ट रूप से समझने के लिए हमें विभिन्न मनोवैज्ञानिकों द्वारा दी गई निम्न परिभाषाओं पर विचार करना अधिक उपयुक्त रहेगा:


एल. एस. शेफर के अनुसार समायोजन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा कोई जीवधारी अपनी आवश्यकताओं तथा इन आवश्यकताओं की संतुष्टि से सम्बन्धित परिस्थियों में संतुलन बनाये रखता है। शेफर के द्वारा दी गई परिभाषा में समायोजन को मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के संदर्भ में परिभाषित करने का प्रयत्न किया गया है। इसके अनुसार कोई बालक या व्यक्ति तभी तक समायोजित अनुभव करता है जब तक उसकी आवश्यकताओं और इन आवश्यकताओं की पूर्ति से जुड़ी हुई उसकी कोशिशों तथा परिस्थितियों के बीच संतुलन बना रहे। जैसे ही यह संतुलन अस्थिर होता है अर्थात व्यक्ति को उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति में बाधा पहुँचती है वह कुसमायोजित होने लगता है।


गेट्स जेरासिल्ड एवं अन्य के अनुसार समायोजन एक सतत प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक व्यक्ति अपने व्यवहार में इस प्रकार से परिवर्तन करता है कि उसे स्वयं तथा अपने वातावरण के बीच और अधिक संबंध स्थापित करने में मदद मिल सके।


गेटस् जेरसिल्ड तथा अन्य के द्वारा दी गई परिभाषा समायोजन को एक ऐसी स्थिति के रूप में देखती है जिसमें व्यक्ति की अपने वातावरण के साथ तालमेल रहता है। अगर व्यक्ति अपने वातावरण में ठीक तरह से संतुष्ट और सुखी नहीं रहता तो वह ऐसा करने के तरीकों, अपनी इच्छाओं तथा लक्ष्यों में तब्दीली कर लेता है। अगर वह यह परिवर्तन कर अपने और अपने वातावरण के बीचे खट-पट नहीं होने देता तो उसे समायोजित कहा जाता है और अगर ऐसा करने में असफल होता है तो उसके कदम कुसमायोजन की ओर बढ़ने लगते हैं।

वातावरण संबंधी स्थितियाँ एक जैसी नहीं रहतीं उनमें बदलाव आता रहता है और इसलिए यह आवश्यक है कि व्यक्ति अपने आप में भी आवश्यक परिवर्तन लाता रहे। जो इस प्रकार के परिवर्तन लाने में जितनी अच्छी तरह सक्षम होता है वह उतना ही समायोजन प्रक्रिया में कुशल जाना जाता है और सही समायोजन ही उसके संतुष्टि और सफलता की ओर ले जाता है। जिसमें यह समायोजन कला है वही सुखी रह सकता है।


वोनहेलर के अनुसार " हम समायोजन शब्द को अपने आपको मनोवैज्ञानिक रूप से जीवित रखने के लिए वैसे ही प्रयोग में ला सकते हैं जैसे कि जीवशासी अनुकूलन शब्द का प्रयोग किसी जीव को शारीरिक या भौतिक दृष्टि से जीवित रखने के लिए करते हैं।"


बोनहेलर की परिभाषा का स्त्रोत डार्विन का विकासवाद है। डार्विन इस सिद्धांत के अनुसार सभी प्राणी अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्ष करते रहते है। उनमें से जिन प्राणियों में बदलती परिस्थितियों में अपने आपको बदलने या अनुकूल की ज्यादा क्षमता होती है उसी रूप में जब उन्हें मनोवैज्ञानिक दृष्टि से अपने अस्तित्व की रक्षा करनी होती है तो वह मनोवैज्ञानिक रूप से उतना स्वस्थ एवं सबल पाया जाता है जीवन में संतुष्टि और आनंद प्राप्ति का मार्ग समायोजन से होकर गुजरता है।


समायोजन का अर्थ होता है कि जीवन की आवश्यकताओं मांगों से अपनी शक्ति ओर सामर्थ्य के संदर्भ में अनुकूलन करके चलना। अतः जो इस प्रकार के मनोवैज्ञानिक अनुकूलन में जितना समर्थ है

वह उतना ही अच्छी तरह अपनी संघर्षपूर्ण जिंदगी को जी सकता है। इस प्रकार उपराक्त तीनों परिभाषाएँ अपने ढंग से समायोजन के अर्थ उसके प्रयोजन के अर्थ उसके प्रयोजन तथा विशेषताओं को प्रकट करने का प्रयत्न करती हैं।


इन तीनों परिभाषाओं के आधार पर निम्नलिखित निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं:


• समायोजन एक प्रक्रिया है, एक ऐसा साधन है जिसके द्वारा सुखी एवं संतोषप्रद जीवनयापन की राह पकड़ी जा सकती है।


• समायोजन हमें मनोवैज्ञानिक रूप से अच्छी तरह जीने के लिए उसी रूप में आवश्यक है जैसे कि बदलते मौसम या हालत में शरीर को जिन्दा रखने के लिए वस्त्रों, खान-पान, रहन में परिवर्तन लाकर अनूकूलन करने की प्रक्रिया।


• समायोजन से हमें अपनी इच्छाओं या आवश्यकताओं तथा इन आवश्यकताओं को पूरा करने संबंधी अपनी योग्यताओं तथा क्षमताओं में संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।

अगर हमारे पास ज्यादा क्षमता और योग्यता होती तो हम अपनी आवश्यकताओं की सीमा बढ़ाते जाते हैं और अगर कम होती है तो हम अपने लक्ष्य की ऊँचाई या आवश्यकताओं की सीमा में कमी कर देते हैं


• समायोजन संबंधी गुण, परिस्थितियों के अनुसार हमें अपने आपको ढालने में पूरी मदद करता है। समायोजन के द्वारा एक ओर तो हम अपने आपको बदलती परिस्थितियों के अनुसार बदलने का प्रयत्न करते हैं तो दूसरी ओर समायोजन हमें ऐसी शक्ति और सामर्थ्य भी देता है कि हम परिस्थितियों को ही बदल डालें। समायोजन के लिए जहाँ अपने को बदलकर संतुलन बनाया जा सकता है अर्थात दूसरे शब्दों से समझौता किया जा सकता है वहाँ ऐसा साहस भी किया जा सकता है कि परिस्थितियों को ही बदल कर अपने अनुकूल या इच्छा अनुसार कर लिया जाए।