किशोरावस्था , विशेषताएँ - adolescence, characteristics

किशोरावस्था , विशेषताएँ - adolescence, characteristics


किशोरावस्था वह समय जिसमें किशोर अपने को वयस्क समझता है। मानव जीवन के विकास की प्रक्रिया में किशोरावस्था का महत्वपूर्ण स्थान है। बाल्यावस्था समाप्त होने के बाद किशोरावस्था शुरू होती है। इसे बाल्यावस्था तथा प्रौढावस्था के मध्य का सन्धिकाल कहते हैं।

अंग्रेजी भाषा में किशोरावस्था के लिए प्रयुक्त शब्द एडोलेसन्स लैटीन भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ परिपक्वता की ओर बढ़ना है।


सामान्यतः किशोरावस्था 12 वर्ष की आयु से 18 वर्ष की आयु तक मानी जाती है। इस अवस्था को तूफान एवं संवेगों की अवस्था कहा गया है। इस अवस्था में किशोर के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और संवेगात्मक विकास में क्रांतिकारी परिवर्तन होते हैं। इस अवस्था में किशोर और किशोरियों में एक नवीन ऊर्जा का संचार होने लगती है। नवीन इच्छाए अभिलाषाएँ उनमें तीव्र रूप से उठती है।


किशोरावस्था की मुख्य विशेषताएँ 


1) शारीरिक विकास


किशोरावस्था को शारीरिक विकास का सर्वश्रेष्ठ काल माना जाता है। इस काल में किशोर के शरीर में अनेक महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं। जैसे भार और लम्बाई में तीव्र वृद्धि माँसपेशियों और शारीरिक ढाँचे में दृढता, किशोर में दाढ़ी और मूंछ एवं किशोरियों में प्रथम मासिक स्त्राव के लक्षण।


2) मानसिक विकास


किशोर के मस्तिष्क का लगभग सभी दिशाओं में विकास होता है। इस अवस्था में वृद्धि एवं विकास अधिकतम हो जाता है। उसमें विशेष रूप से अगलिखित मानसिक गुण पाये जाते है। कल्पना और दिवास्वप्नों की बहुलता बुद्धि का अधिकतम विकास, सोचने-समझने और तर्क करने की शक्ति में वृद्धि विरोधी मानसिक दशायें आदि।


3) घनिष्ठ व व्यक्तिगत मित्रता किसी समूह का सदस्य होते हुए भी विशोर केवल एक या दो बालकों से घनिष्ठ संबंध रखता है, जो उनके परम मित्र होते है।


4) व्यवहार में विभिन्नता


किशोर में आबेगों और संवेगों की बहुत प्रबलता होती है। यही कारण है कि वह विभिन्न अवसरों पर बिभिन्न प्रकार का व्यवहार करता है। जैसे कभी अत्यधिक क्रियाशील तो कभी अत्यधिक शिथिल ।


5) स्थिरता व समायोजन का अभाव


रोस ने किशोरावस्था को शैशवावस्था का पुनरावर्तन काल कहा है। उसकी बाल्यावस्था की स्थिरता समाप्त हो जाती है और वह शिशु के समान अस्थिर हो जाता है।


6) स्वतंत्रता व विद्रोह की भावना


किशोर में स्वतंत्रता व विद्रोह की भावना प्रबल होती है। यदि उस पर कोई प्रतिबन्ध लगाया जाता है तो वह विद्रोह करता है। वह किसी भी प्रकार के बंधनों में बंधना नहीं चाहता बल्कि स्वतंत्र रहना चाहता है।


7) काम शक्ति की परिपक्वता


किशोरावस्था की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इस अवस्था में कामप्रवृत्ति तीव्र होती है। अवस्था के पूर्वकाल में बच्चे और बालिकाओं में समलिंगी आकर्षण बढ़ता है और उत्तरकाल में विषमलिंगी आकर्षण तीव्र रूप से बढ़ता है।


8) समूह को महत्व


किशोर अपने घर, परिवार और विद्यालय से महत्वपूर्ण उस समूह को समझता है जिस समूहका वह सदस्य होता है। वह अपने समूहों के दृष्टिकोण को अधिक महत्व देता है और उन्हीं के अनुसार अपने व्यवहार, रुचिर्या, इच्छाओं आदि में परिवर्तन करता है।


9) रुचियों में परिवर्तन एवं स्थिरता


किशोरावस्था में रुचियों में परिवर्तन होता है, एवं स्थिरता आती है। वेलनटाईन के अनुसार किशोर बालक और बालिकाओं की रुचियाँ में समानता होती है और विभिन्नता भी बालकों को खेल-कूद और व्यायाम में तथा बालिकाओं को कटाई-बुनाई, नृत्य और संगीत में विशेष आकर्षण होता है।


10) समाज सेवा की भावना


किशोर में समाज सेवा की भावना तीव्र होती है।


11) ईश्वर व धर्म में विश्वास


किशोरावस्था के आरम्भ में किशोर को ईश्वर व धर्म में विश्वास और आस्था नहीं होती। पर धीरे-धीरे ईश्वर और धर्म के प्रति आस्था और विश्वास में वृद्धि होने लगती है।


12) जीवन दर्शन का निर्माण


किशोर स्वयं अच्छी और बुरी सत्य और असत्य, नैतिक और अनैतिक इत्यादि बातों के बारे में विचार करने लगता है जिसके फलस्वरूप अपने जीवन दर्शन का निर्माण करता है।


13) अपराध प्रवृत्ति का विकास


किशोरावस्था में बच्चे में अपने जीवन-दर्शन, नये अनुभवों की इच्छा, निराशा, असफलता, प्रेम के अभाव आदि के कारण अपराध प्रवृत्ति का विकास होता है।


14 ) नायक - पूजा


किशोरावस्था में नायक-पूजा प्रवृत्ति पायी जाती है। किशोर किसी भी व्यक्ति को जैसे ऐतिहासिक महापुरुष, वीर, बलिदानी, सन्त, धार्मिक महापुरुष, कुशल खिलाडी, अच्छे वक्ता, राष्ट्रीय नेता, शिक्षक, सिनेमा अभिनेता और अभिनेत्री को अपना आदर्श मान लेता है और उसकी पूजा करने लगता है, हर समय उसकी प्रशंसा करता है। उसको देखकर प्रसन्न होता है। उसका अनुकरण करता है।