स्थिर लाभांश नीति के लाभ - Advantages of Fixed Dividend Policy

स्थिर लाभांश नीति के लाभ - Advantages of Fixed Dividend Policy


स्थिर लाभांश नीति अंशधारको के न्यूनतम हितो को संरक्षित करने वाली नीति है। स्थिर लाभाश नीति अंशधारको एवं कम्पनी दोनों के दृष्टिकोण से लाभदायी है। इस नीति के निम्नांकित लाभ है


1. न्यूनतम आय की निच्छितता (Certainty in the minimum Income) - अंशधारकों को इस नीति के तहत नियमित आय प्राप्त होती रहती है और वे कम्पनी के नीति से संतृष्ट रहते है। कम्पनी में आय की मात्रा कम होने पर भी सुनिच्छित लाभांश अवश्य प्राप्त होने के कारण यह नीति विनियोजकों द्वारा अत्यंत पसंद की जाती है।


2. कम्पनी पर विश्वास में वृद्धी (Increases Company's Credibility) - इस नीति के तहत नियमित एवं स्थिर आय प्राप्त होने के कारण कम्पनी के अशधारकों में कम्पनी के प्रति विश्वास / साख में यह नीति वृद्धी करती है।

कम्पनी में आय की मात्रा कम होने पर भी अपूती संचित कोषों में से सुनिच्छित लाभाश अवश्य प्राप्त होने के कारण अंशधारकों को यह विश्वास होता है की कम्पनी का संचालन प्रबंधकों के द्वारा उनके हितो को ध्यान में रखकर कुशलता एवं सफलता से हो रहा है। इस नीति के कारण अंशो के मूल्य में वृद्धी होती रहती है जिससे अंशधारकों को अधिक लाभ प्राप्त होता है।


3. अशो के बाजार मूल्य में स्थायित्व (Stable Market Price of Shares ) – इस नीति के तहत नियमित एवं सुनिच्छित दर से लाभांश का भुगतान करने वाले कम्पनीयों के अशो का बाजार मूल्य सम्भवता स्थिर रहता है।

ऐसे स्थिति में अशों के बाजार मूल्य में कम उच्चावचन होने के कारण कम्पनी की साख में अभिवृधि होती है। इस स्तिर लाभाश नीति के कारण अशधारियों को तथा समाज को भी लाभ होता है क्योंकि कम्पनी के अशो पर सट्टेबाजी भी कम होती है।


4. संस्थागत विनियोजकों की पसंद (Preferred by Investors ) - स्थिर लाभांश नीति के कारण विनियोजकों को आश्वाषण मिलता है की ऐसे कम्पनियों के अंश के मूल्य में अधिक उच्चावचन नहीं होगा। स्थिर आय प्राप्त करने की अपेक्षा में विनियोजक ऐसे कम्पनी में विनियोग करना पसंद करते हैं। स्थिर लाभाश देनेवाली कम्पनियों में संस्थागत निवेशक, जैसे की भारतीय जीवन बीमा निगम, भारतीय यूनिट ट्रस्ट,

बैंक्स, वित्तीय निगम, इत्यादी संस्था विनियोग करना पसंद करते हैं। इन संस्थओं को आकर्षित करने हेतु स्थिर लाभाश नीति अपनाई जाती है।


5. अतिरिक्त पूंजी प्राप्ती के सहायक (Help to Acquire Extra Capital) - अंशो के बाजार मूल्य में कम उच्चावचन होने के कारण कम्पनी की साख में अभिवृधि होती है जिससे कम्पनी सफलतापूर्वक ऋण प्राप्त कर अतिरिक्त पूंजी प्राप्त कर सकती है।


6. दीर्घकालीन नियोजन हेतु उपयुक्त इस नीति के तहत दिए जाने वाले नियमित एवं सुनिच्छित दर से लाभांश का अनुमान आसानिसे लगाया जा सकता है। व्यय अनुमान के आधार पर कम्पनी के विस्तार हेतु दीर्घकालीन योजना बनाकर आवश्यक वित की व्यवस्था आसानी पूर्वक की जा सकती है।