मीडिया और अन्य लोकप्रिय माध्यमों की भूमिका का विश्लेषण - Analysis of the role of media and other popular media

मीडिया और अन्य लोकप्रिय माध्यमों की भूमिका का विश्लेषण - Analysis of the role of media and other popular media


साहित्य एवं मीडिया शिक्षा के अनुभवों का एक बहुरंगी चित्र प्रस्तुत करती है जिसमें रचनाकारों की सामाजिक अवस्थिति प्रतिबिंबित होती है। जेंडर, यौनिकता, वर्ग, जाति और धर्म आदि इन सभी के साथ शिक्षा अविभाज्य रूप से बंधी होती है। इन माध्यमों के जरिए हम उन प्रक्रियाओं को देखने की कोशिश करते हैं जिनके मार्फ़त किसी ऐतिहासिक क्षण में शिक्षा विकसित होती है- यानि समाज किसी ख़ास काल में शिक्षा की क्या ज़रूरत महसूस करता है, किस तरह के महिला और पुरुष को आदर्श माना जाता है, किसी ख़ास मौके पर किस तरह के राष्ट्र या समुदाय या परिवार को अनिवार्य माना जाता है। शिक्षा का एक महत्वपूर्ण आयाम यह तय करना रहा है कि कौन-से ज्ञान को वैध और प्रसार के योग्य माना जा सकता है। शिक्षा उस वैध माने जाने वाले ज्ञान में सत्ता का बोध पैदा कर देती है। लिहाजा धीरे धीरे कुछ ख़ास तरह की लिखित सामग्री और कुछ ख़ास विचारों- ऐतिहासिक, वैज्ञानिक, धार्मिक, साहित्यिक- को वैधता और विश्वसनीयता मिल जाती है

जो जनसंचार के विभिन्न माध्यमों एवं मीडिया द्वारा समाज के अलग-अलग समूहों एवं वर्गों तक पहुँचते हैं एवं उनकी सोच में परिवर्तन लाने के साथ साथ उन्हें अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति सजग एवं जागरूक बनाते हैं। शिक्षा व् ज्ञान के प्रचार एवं प्रसार के लिए सरकार को दूरदर्शन व रेडियो के माध्यम अधिक-से-अधिक उपयोग में लाना चाहिए। शिक्षाप्रद कार्यक्रमों/सीरियल के माध्यम से स्त्रियों व कन्याओं को अपने अधिकार, समाज व देश की ज्वलंत समस्याओं से अवगत कराना चाहिए। उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त होने के उपायों, स्वच्छता और आधुनिक उपकरणों के विषय में जानकारी दी जानी चाहिए। प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम गाँवों में स्कूल खोल देने मात्र से सफल नहीं हो सकते। यदि दूरदर्शन पर प्रौढ़ शिक्षा देने का कार्यक्रम प्रारंभ किया जाए तो यह योजना अधिक प्रभावी होगी।