कार्यशील पूंजी का विश्लेषण या कार्यशील पूंजी के प्रबन्ध में क्षमता के मापदण्ड - Analysis of Working Capital or Criteria of Efficiency in Management of Working Capital

कार्यशील पूंजी का विश्लेषण या कार्यशील पूंजी के प्रबन्ध में क्षमता के मापदण्ड - Analysis of Working Capital or Criteria of Efficiency in Management of Working Capital


यह तो पहले ही बतलाया जा चुका है कि संस्था के अन्तर्गत कार्यशील पूंजी न तो आवश्यकता से कम होनी चाहिए और न ही आवश्यकता से अधिक होनी चाहिए यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि संस्था में प्रत्येक समय आवश्यकतानुसार पर्याप्त मात्रा में कार्यशील पूंजी बनी रहेगी, तो संस्था का संचालन भी सफलतापूर्वक सम्पादित किया जा सकेगा और विनियोग पर प्रत्याय को अधिकतम बनाया जा सकेगा। अतः वितीय प्रबन्ध का सदैव यही प्रयास होता है कि संस्था की आवश्यकता व कार्यशील पूंजी की मात्रा में संतुलन बना रहे। वित्त प्रबन्ध इस सम्बन्ध में तभी आश्वस्त हो पायेगा, जब न केवल कुल कार्यशील पूंजी में होने वाले परिवर्तनों को ही ध्यान में रखा जाय,

बल्कि कार्यशील पूंजी की व्यक्तिगत मदों में होने वाले परिवर्तनों को भी सावधानी के साथ जांचा जाय । अन्य शब्दों में, चालू सम्पतियों एवं चालू दायित्वों के व्यक्तिगत मदों के सम्बन्ध में सतर्कता से खोज की जाय, ताकि कार्यशील पूंजी पर उचित नियंत्रण रखा जा सके और इसकी मात्रा किसी भी समय आवश्यकता से कम या अधिक न होने पाये। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि समय-समय पर कार्यशील पूंजी की पर्याप्तता एवं कुशलता की जांच करना आवश्यक होगा। जब हम कार्यशील पूंजी के विभिन्न अवयवों की सूक्ष्मता एवं गहन से जांच इस उदेश्य से करते है कि उसकी मात्रा व्यावसायिक आवश्यकताओं से कम है या अधिक तो उसे कार्यशील पूंजी का विश्लेषण कहते है ।