आपतन का कोण - Angle of Incidence

आपतन का कोण - Angle of Incidence


यह विक्रय रेखा और कुल लागत रेखा के बीच प्रतिच्छेदन का कोण होता है। वास्तव में आपतन के कोण दो होते हैं (i) सम- विच्छेद बिन्दु के दाहिनी ओर बना कोण तथा (ii) सम-विच्छेद बिन्दु के बायीं ओर बना कोण पहला वाला कोण सम-विच्छेद बिन्दु के बाद लाभ क्षेत्र बतलाता है जबकि बाद वाला कोण सम-विच्छेद बिन्दु से पूर्व हानि-क्षेत्र इंगित करता है। आपतन के कोण का आकार फर्म द्वारा विभिन्न उत्पादन मात्रा / बिक्री के स्तरों पर फर्म के लाभ अथवा हानि की दर बतलाता है। यह कोण जितना बड़ा होगा, लाभ की दर उतनी ही अधिक होगी। प्रबन्ध का लक्ष्य यथा सम्भव इस कोण को बड़ा करना होगा। यह कोण यह भी बतलाता है कि लाभ का इच्छित स्तर पर प्राप्त करने के लिये उत्पादन मात्रा और विक्रय मूल्य में किस सीमा तक परिवर्तन किये जाने चाहिये। यह क्रियाशीलता के विभिन्न स्तरों के अन्तर्गत तथा विभिन्न उत्पाद- मिश्रणों के लिये भी लाभप्रदता की सरल एवं स्पष्ट जानकारी प्रदान करता है तथा यह बिना किसी प्रकार की गणना किये लाभार्जन क्षमता ज्ञात करने का सरल दृश्य साधन (visual aid ) है ।

सामान्यता फर्म की सुदृढ़ता के आकलन के लिये सुरक्षा सीमा और आपतन के कोण पर सम्मिलित रूप से विचार किया जाता है। वृहत् आपतन कोण के साथ उच्च सुरक्षा सीमा फर्म की सर्वाधिक अनुकूल स्थिति दर्शाता है तथा निम्न आपतन कोण के साथ निम्न सुरक्षा सीमा फर्म की बुरी वित्तीय आकृति की ओर इंगित करता है। निम्न कोण यह भी बतलाता है कि परिवर्तनशील लागत विक्रय की लागत का एक बढ़ा भाग है। अतः विक्रय की लागत में परिवर्तनशील लागतों का भाग जितना कम होगा, आपतन का कोण उतना ही वृहत् होगा। सम-विच्छेद चार्ट पर उत्पादन क्षमता / विक्रय की मात्रा का प्रदर्शन सम-विच्छेद चार्ट पर उत्पादन क्षमता / विक्रय की मात्रा को तीन प्रकार से प्रदर्शित किया जा सकता है (1) मूल्यों में, (2) इकाइयों में, अथवा (3) क्षमता प्रतिशत के रूप में। इनमें से कौन-सा आधार चुना जाये, यह चार्ट के उद्देश्य (समस्या के हल के लिए आवश्यक सूचना) पर निर्भर करता है। सामान्यतया विक्रय आधार चुना जाता है तथा इसे मौद्रिक रूप में व्यक्त किया जाता है।


(1) उत्पादन / विक्रय- मात्रा के रुपयों में दिये होने पर (When production/sales volume is given in rupees ) - इस स्थिति में सम-विच्छेद चार्ट बनाते समय यह ध्यान रखना चाहिये कि X- अक्ष पर विक्रय / उत्पादन मात्रा और Y-अक्ष पर लागतों व आगम दोनों में समान पैमाने लिये जायें अर्थात् X- अक्ष पर एक इंच (अथवा 10 सेन्टीमीटर) जितने रुपयों के बराबर माना है, Y-अक्ष पर भी उसे उतने ही रुपयों के बराबर माना जाये।


(2) उत्पादन / विक्रय- मात्रा के इकाइयों में दिये होने पर ( When production / sales volume is given in units) एक-दूसरे से पूर्णतया स्वतन्त्र रहते हैं। इस स्थिति में X- अक्ष और Y-अक्ष पर पैमाने


(3) उत्पादन / विक्रय - मात्रा के क्षमता प्रतिशत में दिये होने पर इस स्थिति में X - अक्ष पर उत्पादन / विक्रय मात्रा के क्षमता प्रतिशत दिखलाते हैं तथा Y-अक्ष पर आगम व लागत दिखलाते हैं।