आकलन हेतु कार्य , परियोजना - Assessment work, project
आकलन हेतु कार्य , परियोजना - Assessment work, project
परियोजना (Project) द्वारा आकलन
जॉन डीवी (John Dewey) के शिष्य डब्लु.एच. किलपेट्रिक (W.H.Kilpatrick) ने इस विधि को जन्म दिया। उनके अनुसार "परियोजना वह क्रिया है, जिसमें पूर्ण संलग्नता के साथ सामाजिक वातावरण में लक्ष्य प्राप्त किया जाता है।" इस विधि में विद्यार्थियों के समक्ष एक समस्या प्रस्तुत की जाती है और विद्यार्थी उसका हल निकालने में लगे रहते हैं। इसमें विद्यार्थी अपनी रुचि व इच्छा के अनुसार कार्य करता है।
परियोजना के पद
प्रत्येक परियोजना को निम्नांकित भागों में बांटा जाता है-
1. परियोजना का चयन - शिक्षक को ऐसी परिस्थिति का निर्माण करना चाहिए जिसमें विद्यार्थी स्वयं योजनाएँ बनाने लगे।
इस प्रकार विद्यार्थियों द्वारा प्राप्त विभिन्न परियोजनाओं पर स्वतंत्रतापूर्वक विद्यार्थी एवं शिक्षक मिलकर विचार विमर्श करें। जहाँ तक हो सके विद्यार्थियों को स्वयं ही परियोजना के चयन का अवसर मिलना चाहिए। शिक्षक को आवश्यकतानुसार चयन की प्रक्रिया में परामर्श देना चाहिए।
2. रूपरेखा तैयार करना - परियोजना के चयन के पश्चात उसे पूर्ण करने के लिए कार्यक्रम बनाना चाहिए। कार्यक्रम के निर्धारण में विद्यार्थियों को विचार-विमर्श के लिए पूर्ण छूट होनी चाहिए।
3. कार्यक्रम का क्रियान्वयन - कार्यक्रम की रूपरेखा बनाने के बाद परियोजना के अंतर्गत कार्य प्रारम्भ हो जाता है। जिन विद्यार्थियों को जो उत्तरदायित्व सौंपे गए हैं, वे पूरे करना शुरू कर देते हैं।
विद्यार्थियों को अपने उत्तरदायित्व पूरा करने के लिए विभिन्न प्रकार का ज्ञान प्राप्त करना पड़ता है। इस प्रकार प्राप्त ज्ञान अधिक स्थायी होता है।
4. मूल्यांकन – योजना पूर्ण होने के बाद शिक्षक एवं विद्यार्थी मिलकर मूल्यांकन करते हैं। परियोजना के उद्देश्य के आधार पर परियोजना की सफलता तथा असफलता पर विचार किया जाता है। समय-समय पर विद्यार्थी अपने-अपने कार्य पर विचार करते हैं, एक-दूसरे की गई गलतियों को ठीक करते हैं और उपयोगी ज्ञान की पुनरावृत्ति करते हैं।
परियोजना के प्रकार
शिक्षण के क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की परियोजनाएँ बनाकर विद्यार्थियों को सक्रिय ज्ञान प्रदान किया जा सकता है। ये परियोजनाएँ निम्न प्रकार के हो सकते हैं-
1. निर्माण संबंधी परियोजना- जैसे विद्यालय में वाटिका, संग्रहालय, एक्वेरियम, टेरेरियम, वाइवेरियम, यंत्रों आदि के निर्माण संबंधी परियोजनाएँ।
2. निरीक्षण संबंधी परियोजना- इसमें पर्यटन आदि के माध्यम से विभिन्न स्थानों पर विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु, कीट, पतंगे, जलवायु, वनस्पति, पुष्पों आदि की विशिष्ट विशेषताओं के निरीक्षण के लिए परियोजनाएँ बनाई जा सकती हैं।
3. उपभोक्ता परियोजना- जैसे कृषि, बागवानी आदि।
4. संग्रह संबंधी परियोजना- जैसे विभिन्न स्थानों से विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु, पक्षी, पौधे, चित्र, माडल, आदि के संग्रह संबंधी परियोजनाएँ।
5. पहचान संबंधी परियोजना - जेसे फल, फूल, बीज, जड़, जीव-जंतु के वर्ग एवं श्रेणी संबंधी परियोजनाएँ।
6. शल्य- कार्य संबंधी परियोजना- जैसे जीव-जंतु, जड़ तना, फूल, फल आदि को काटकर उनके आंतरिक अंगों के अध्ययन संबंधी परियोजनाएँ।
7. समस्यात्मक परियोजना- जैसे आहार में सुधार, स्वास्थ्य में सुधार आदि ।
परियोजना नीति की विशेषताएँ
परियोजना नीति की निम्न विशेषताएँ हैं-
1. विद्यार्थी स्वयं चिंतन करके पढ़ते हैं और कार्य करते हैं।
2. विद्यार्थी पूरी योजना में सक्रिय रहता है।
3. इसमें शारीरिक एवं मानसिक दोनों प्रकार के कार्य ही विद्यार्थियों को करने पड़ते हैं, फलस्वरूप श्रम के प्रति उनमें निष्ठा जागृत होती है।
4. विद्यार्थी अपने उत्तरदायित्वों को समझता है एवं पूरा करता है।
5. विद्यार्थियों में धैर्य, संतोष तथा आत्म-संतुष्टि के भाव जागृत होते हैं।
6. यह मनोवैज्ञानिक विधि है।
7. यह स्वयं करके सीखने पर आधारित है।
8. विभिन्न विषयों में सहयोग स्थापित होता है।
9. प्राप्त ज्ञान स्थायी होता है।
परियोजना नीति के दोष
परियोजना नीति के दोष निम्न प्रकार से है
1. यह कक्षा शिक्षण से अधिक समय लेती है।
2. ज्ञान क्रमबद्ध तरीके से प्राप्त नहीं होता।
3. निश्चित पाठ्यक्रम इस नीति से पूरा करना कठिन है।
4. शिक्षक को अधिक परिश्रम करना पड़ता है।
5. अधिक व्यय साध्य है।
6. अनुभवहीन शिक्षकों के लिए कठिनाइयाँ पैदा करने वाली है।
7. वास्तविक सिद्धांतों का सही ज्ञान नहीं होता।
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