आदर्श वित्तीय विवरणों के गुण या विशेषताएँ - Attributes or Characteristics of Ideal Financial Statement

आदर्श वित्तीय विवरणों के गुण या विशेषताएँ - Attributes or Characteristics of Ideal Financial Statement


वित्तीय विवरणों को तब आदर्श कहा जा सकता है जबकि वे व्यवसाय की स्थिति तथा उसकी लाभप्रदता का सही एवं सच्चा चित्र प्रस्तुत करें। अमेरिकन एकाउन्टिंग एसोसिएशन ने वित्तीय विवरणों के गुणों में सरलता, विषयपरकता तथा एकरूपता पर जोर दिया है। उनके शब्दों में, “Every corporate statements should be based on accounting principles which are sufficiently uniform, objective and well understood to justify opinions as to the condition and progress of the business "enterprise behind it." 

इस प्रकार एक आदर्श वित्तीय विवरणों में निम्नलिखित गुण होते हैं-


(1) प्रासांगिकता या अनुरूपता (Relevance ) वित्तीय विवरण व्यवसाय के उद्देश्यों के अनुरूप होने चाहियें। ऐसा तभी सम्भव है जबकि लेखापालक को यह जानकारी हो कि इन लेखों का किस प्रकार प्रयोग किया जायेगा।


( 2 ) सरलता (Easiness) वित्तीय विवरणों की रचना को सरल बनाया जाये। रचना में सरलता से अभिप्राय यह है कि इनके लिये आवश्यक समंक खाताबाही से सरलता से प्राप्त होने चाहिये। इसके लिये बहुत गणनाओं की आवश्यकता नहीं होनी चाहिये। इसके अतिरिक्त इसका आकार बहुत बड़ा नहीं होना चाहिये और लेखा-मशीनों के प्रयोग के योग्य होना चाहिये। इनमें बहुत अधिक कॉलम हो एवं इन्हें विवरण रूप में तैयार किया जाये।


(3) साधारण व्यक्ति के लिये भी सगम (Intelligible to a Common Man) वित्तीय विवरण स्पष्ट व बोधगम्य होने चाहिये। ये इस प्रकार से तैयार किये जायें जिससे कि लेखाशास्त्र के सिद्धान्तों का ज्ञान न रखने वाला व्यक्ति भी इनका अध्ययन कर सके और उन्हें समझ सके। इसके लिये यह उचित होगा कि इनका प्रारूप हो, जहाँ तक हो सके सरल एवं गैर-तकनीकी भाषा का प्रयोग किया जाये तथा महत्वपूर्ण मदों और उनकी राशियों को बड़े अक्षरों में अथवा भिन्न स्याही में दिया जाये।


(4) शुद्धता (Accuracy) वित्तीय विवरण पूर्णतया शुद्ध होने चाहिये जिससे कि इनके अध्ययनकर्त्ता इनसे व्यवसाय की स्थिति, प्रगति और भविष्य की सही जानकारी प्राप्त कर सके। 


(5) पूर्णता (Completeness) वित्तीय विवरणों में व्यवसाय से सम्बन्धित सभी सूचनायें एवं आँकड़े दिये जायें किन्तु अनावश्यक, अमहत्वपूर्ण व विस्तृत आँकड़े और सूचनाओं को देकर इन्हें अनावश्यक विस्तृत तथा जटिल नहीं बनाया जाना चाहिये। अंतः पूर्णता के साथ-साथ इनकी सक्षिप्तता पर भी ध्यान देना चाहिये। 


(6) आकर्षक (Attractive) – वित्तीय विवरण तैयार करते समय महत्वपूर्ण सूचना रेखांकित करके अथवा बड़े अक्षरों में या किसी भिन्न स्याही से दी जानी चाहिये जिससे कि पाठकों का ध्यान वित्तीय विवरणों की सर्वाधिक महत्वपूर्ण मदों की ओर स्वतः ही खिंचाये।


(7) तुलनात्मक (Comparability ) जब तक वित्तीय विवरण के परिणामों की तुलना न की जाये, इन परिणामों का कोई महत्व नहीं होता अतः ये इस प्रकार तैयार किये जायें कि जिससे विभिन्न अंकों की तुलना सम्बन्धित पिछली अवधियों से अथवा अन्य उसी प्रकार की संस्थाओं से की जा सके।

यह तुलना पूर्व-निर्धारित प्रमापों या लक्ष्यों से भी की जा सकती है। व्यवसाय के भूतकालीन क्रियाकलापों से तुलना के लिये यह उचित होगा कि वित्तीय विवरणों में वर्तमान वर्ष के समंकों के साथ-साथ गत वर्ष के समक भी दिये जायें। इनके विश्लेषणात्मक परीक्षण के लिये पिछले वर्ष के समक बहुत उपयोगी सिद्ध होते हैं। वित्तीय विवरणों में तुल्यता के लिये प्रतिवर्ष मे एकरूपता बनाये रखना तथा एकरूप व विषयपरक लेखा - सिद्धान्तों का प्रयोग करना आवश्यक होगा।


(8) शीघ्रता (Promptness) वित्तीय विवरणों को लेखा वर्श की समाप्ति के पश्चात् अति षीघ्र प्रकाषित कर देना चाहिये।


(9) विश्लेषणात्मक प्रस्तुतीकरण (Analytical Representation) - वित्तीय विवरणों में इनके विश्लेषण और व्याख्या के लिये आवश्यक सूचनायें स्पष्ट व वर्गीकृत रूप में प्रस्तुत की जानी चाहिये

जिससे कि विश्लेषण के लिये आवश्यक मदें व अंक सरलतापूर्वक ज्ञात की जा सके।

वित्तीय विवरणों में कुछ महत्वपूर्ण अनुपात देकर इनकी महत्वपूर्ण मदों के आपसी सम्बन्धों को प्रकट किया जा सकता है। वित्तीय विश्लेषण में ये अनुपात बहुत सहायक सिद्ध होते हैं।


(10) अनुसूचियों का प्रयोग (Use of Schedules) यदि वित्तीय विवरणों की किन्हीं मदों के सम्बन्ध मे विस्तृत सूचना देना आवश्यक है तो इस प्रकार की विस्तृत सूचनाओं को वित्तीय विवरणों के पश्चात् अनुसूचियों के रूप में देना चाहिये। यद्यपि ये अनुसूचियों वित्तीय विवरणों का अंग होती है, किन्तु इनके देने से वित्तीय विवरण का मुख्य भाग आँकड़ों के जंजाल से बच जाता है।