औसत प्रत्याय विधि ,विशेषताएँ , आलोचना - Average Return Method, Characteristics, Criticism

औसत प्रत्याय विधि ,विशेषताएँ , आलोचना - Average Return Method, Characteristics, Criticism


इस विधि के अनेक नाम हैं, इसे लेखांकन विधि या विनियोग पर प्रत्याय या औसत प्रत्याय दर भी कहते हैं। इस विधि के अनुसार जब विभिन्न परियोजनाओं का मूल्यांकन करके उनमें से किसी एक को चुनना होता है तब सभी परियोजनाओं की प्रत्याय दर ज्ञात की जाती है तथा सबसे ऊँची प्रत्याय दर वाली परियोजना को स्वीकार कर लिया जाता है। इसके विपरीत जब किसी एक ही परियोजना की लेखांकन प्रत्याय दर ज्ञात करना हो, तब परियोजना की प्रत्याय दर प्रबंध द्वारा स्वीकार्य न्यूनतम दर के बराबर या उससे अधिक होनी चाहिए। इस विधि के अनुसार दीर्घकालीन परियोजनाओं का मूल्यांकन किया जाता है। इस विधि के अनुसार प्रत्याय दर निम्न प्रकार से ज्ञात की जा सकती है-


औसत प्रत्याय विधि की विशेषताएँ-


1. यह अत्यधिक सरल विधि है।


2. इस विधि में परियोजना के संपूर्ण जीवन पर विचार किया जाता है।


3. इस विधि में लाभदायकता की जाँच के आधार पर परियोजना का चुनाव किया जाता है।


4. इसमें ह्यस की राशि घटाकर शुद्ध आय की गणना की जाती है, जो साद्धांतिक दृष्टि से उचित है।


5. इस विधि को अपनाकर पूँजी का सर्वोत्तम प्रयोग किया जा सकता है।


औसत प्रत्याय विधि की आलोचना


1. इस विधि में समयरूपी कारक पर विचार नहीं किया जाता है।


2. इस विधि द्वारा व्यावसायिक लाभों पर पड़ने वाले सूक्ष्म प्रभावों की जाँच संभव हो पाती है।


3. इस विधि द्वारा विनियोग की उचित प्रत्याय दर का निर्धारण संभव नहीं हो पाता है।


4. इस विधि में प्रयुक्त आय एवं विनियोग की धारणा अस्पष्ट है।