पिछड़े हुए विद्यार्थी - backward students
पिछड़े हुए विद्यार्थी - backward students
पिछड़े हुए विद्यार्थी से अभिप्राय उन विद्यार्थियों से है जिनकी उपलब्धि की मात्रा उनके स्वाभाविक योग्यता स्तर की तुलना में किसी कारणवश काफी कम होती है। नवीन बातों को ग्रहण करने में सामान्य से कम योग्यता का प्रदर्शन करने की वजह से इन्हें बहुधा धीमी गति से सीखने वाले विद्यार्थी की संज्ञा भी दी जाती है। पिछड़े विद्यार्थियों में कम बुद्धिवाले का पाया जाना जरुरी नहीं होता। दूसरे शब्दों में बुद्धिमान होने का अर्थ यह नहीं है कि अब वह बालक पिछड़ेपन का शिकार नहीं हो सकता। जितना उच्च उसका बुद्धि या योग्यता स्तर है अगर वह उसके अनुरूप प्रदर्शन नहीं करता तो उसे भी पिछड़ा हुआ ही माना जाएगा। पिछड़ेपन के लिए उत्तरदायी कारक या तो बालक विशेष में ही निहित होते है जैसे उसकी शारीरिक तथा मानसिक न्यूनताएं, संवेगात्मक अस्थिरता तथा स्वभावगत विशेषताएँ रुचियाँ इत्यादि। इसके अलावा पिछड़ेपन का कारण विद्यार्थी के वातावरण में भी निहित होते हैं जैसे घर परिवार, पास-पड़ोस, विद्यालय तथा उच्च सामाजिक संस्थाओं से सम्बन्धि प्रतिकूल परिस्थितियां । पिछड़े बालकों के पिछडेपन को दूर करने हेतु उपचारात्मक कदम उठाने में पहल उनके पिछड़ेपन की प्रकृति और उससे सम्बन्धित कारणों के उचित निदान से की जानी चाहिए और फिर उसको ध्यान में रखते हुए ही उचित कदम उठाये जाने चाहिएं।
वार्तालाप में शामिल हों