बजटरी नियन्त्रण के लाभ - Benefits of Budgetary Control
बजटरी नियन्त्रण के लाभ - Benefits of Budgetary Control
बटरी नियन्त्रण से व्यावसायिक नीति, योजनायें और क्रियायें समन्वित, एकीकृत व नियन्त्रित की जाती है। ब्लौकर और वैलमर के शब्दों, "बजटरी नियन्त्रण की व्यवस्था उत्तरदायित्व एवं अधिकार का विभाजन करने में प्रबन्ध की सहायता करने, भविष्य के लिए अनुमान एवं योजनायें तैयार करने, अनुमानित एवं वास्तविक परिणामों के बीच विचलनों के विश्लेषण करने में सहायता करने और कार्य- कलाओं की कुशलता का मूल्यांकन करने लिये माप का आधार या प्रमाप विकसित करने हेतु की जाती है।" बजटरी नियन्त्रण से निम्नलिखित लाभों की प्राप्ति की आशा की जा सकती है:
(1 ) नियोजन में सुधार : इसमें निम्नलिखित लाभों का समावेश किया जाता है :
(अ) भावी परिस्थितियों पर बुद्धिमतापूर्वक विचार : बजट प्रणाली प्रबन्ध को व्यापार की भावी समस्याओं पर पहले से ही विचार करने के लिए प्रोत्साहित करती है।
इससे प्रबन्ध व्यापार की भावी समस्याओं के प्रति पहले से ही जागरूक हो जाता है और इसके समाधान के लिए पहले से ही आवश्यक उपाय कर सकता है।
(ब) व्यापारिक क्रियाओं में स्थायित्व : बटटरी नियन्त्रण में व्यावसायिक क्रियाओं को विभिन्न नियन्त्रण अवधियों में विभाजित किया जाता है। इससे व्यवसाय को सामयिक या मौसमी परिवर्तनों से दूर किया जा सकता है और व्यापार चक्रों के कुप्रभावों से बचाया जा सकता है। इससे व्यावसायिक क्रियाओं में स्थायित्व लाया जा सकता है।
(स) अधिकार एवं दायित्वों का अन्तरण बटरी नियन्त्रण पद्धति में बहुत से उत्तरदायित्व केन्द्र (बजट केन्द्र) स्थापित किये जाते हैं।
इससे प्रबन्ध बड़ी सरलता से अधिकार एवं उत्तरदायित्व का अनतरण करके भी सम्पूर्ण नियन्त्रण अपने हाथ में रख सकता है। अतः बजट प्रणाली से व्यवसाय के प्रत्येक कार्य के लिए एक निश्चित व्यक्ति को उत्तरदायी ठहराया जा सकता है।
(द) उद्देश्यों का स्पष्टीकरण : बजट प्रणाली में प्रत्येक कर्मचारी को अपने कार्य-क्षेत्र, कार्य- मात्रा, उत्तरदायित्व, अधिकार सीमा के सम्बन्ध में कोई भ्रम नहीं रहता। प्रबन्ध-संचालक से लेकर एक पर्यवेक्षक तक यह जानता है कि निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए उसे क्या करना है । प्रत्येक अधिकारी को अपने विभाग की क्रियाओं के संचालन में कुशलता प्रदिर्शत करने का अवसर रहता है। इससे उनमें कर्त्तव्य परायणता की भावना बढ़ती है।
(इ) साधनों का सदुपयोग : बजटरी नियन्त्रण में कार्य के लक्ष्य तथा उत्तरदायित्व निश्चित हो जाने से कर्मचारी सतर्क हो जाते हैं
और संस्था के सीमित साधनों के अधिकतम लाभदायक प्रयोग के लिए प्रयत्नशील रहते हैं। इससे मानव मशीन व सामग्री के प्रयोग में कुशलता आती है तथा अपव्यय की सम्भावनायें कम होती है रोकड प्राप्तियों और रोकड भुगतानों के पूर्वानुमान से एक वित्तीय प्रबन्धक व्यवसाय के फालतू कोषों के सर्वोत्तम उपयोग के लिए योजना बना सकता है तथा रोकड़ की कमी की स्थिति में पहले से ही उधार की व्यवस्था कर सकता है।
(फ) नियोजन से निश्चितता : बजट प्रणाली में सभी व्यावसायिक क्रियाओं को आंकड़ों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इससे नियोजन में निश्चितता आती है।
(ज) संस्था के समपार्शिवक मूल्य में वृद्धि : बटरी नियन्त्रण सुदृढ नियोजन व कुशल प्रबन्ध का सूचक माना जाता है।
बैंक व अन्य वित्तीय संस्थायें किसी व्यावसायिक संस्था को ऋण देने से पूर्व उसकी भावी योजनाओं के प्रति आश्वस्त होना चाहती है। इसके लिए बजट प्रणाली बहुत उपयोगी होती है।
(2) समन्वय में सहायक : इसके अन्तर्गत निम्नलिखित लाभों को सम्मिलित किया जा सकता है:
( अ ) सन्तुलित कार्य-कलापों को प्रोत्साहन : बजट प्रणाली से व्यवसाय की विभिन्न क्रियाओं, विभागों तथा कर्मचारियों के कार्यों में प्रभावपूर्ण समन्वय स्थापित किया जाता है। इससे सन्तुलित कार्य-कलापों को प्रोत्साहन मिलता है और संस्था में अति उत्पादन या कम उत्पादन सामग्री की कमी या प्रचुरता आदि की समस्याऐं स्वयं ही दूर हो जाती है।
(ब) सहयोग तथा दल भावना का प्रोत्साहन बजट तैयार करने में सभी विभागाध्यक्षों का सहयोग रहता है तथा विभागीय बजट एक-दूसरे से सम्बन्धित होते हैं। इससे विभिन्न विभागाध्यक्षों में मनमुटाव कम हो जाता है तथा उनमें व्यवसाय के सामान्य उद्देश्यों के लिये सहयोग व मिल-जुलकर काम करने की भावना रहती है।
(स) बजटरी नियन्त्रण से व्यावसायिक नीतियों योजनाओं व कार्य-कलापों में पूर्ण समन्वय लाया जा सकता है।
(3) विस्तृत नियन्त्रण : बजटरी नियन्त्रण व उत्तरदायित्व निर्धारण और वास्तविक निष्पादन की बजट से निरन्तर तुलना होते रहने से प्रबन्ध व्यावसायिक क्रियाओं पर प्रभावशाली नियन्त्रण स्थापित करने,
लागत नियन्त्रण प्रभावशाली बनाने तथा सुधारात्मक कार्यवाहियों में सफल होता है। वास्तव में बजटरी नियन्त्रण विभागीय अधिकारियों के कार्य-कलापों के मूल्यांकन का एक बहुत ही उपयोगी यन्त्र है । वास्तविक निष्पादन की बजट अंकों से तुलना करने से त्रुटि की प्रकृति तथा उसके लिए उत्तरदायी अधिकारी का पता लगता है। इससे प्रबन्ध अवांछनीय प्रवृत्तियों का यथाशीघ्र निवारण कर सकता है। बजटरी नियन्त्रण व्यावसायिक संस्था की आधारभूत नीतियों की सामयिक जांच का भी एक उपयुक्त साधन है।
(4) अन्य लाभ :
( अ ) प्रमाप परिव्ययन में सहायता बजट प्रणाली के प्रयोग से प्रमाप परिव्यय पद्धति की स्थापना में सुविधा होती है।
बजट प्रणाली में उत्पादन स्तर के निर्धारित किये जाने से प्रमापित लागतों के निर्धारण में सरलता रहती है।
(अ) प्रमाप परिव्ययन में सहायता बजट प्रणाली के प्रयोग से प्रमाप परिव्यय पद्धति की स्थापना में सुविधा होती है। बजट प्रणाली में उत्पादन स्तर के निर्धारित किये जाने से प्रमापित लागतों के निर्धारण में सरलता रहती है।
(अ) सम्पूर्ण राष्ट्र को लाभ सभी संस्थाओं में बजटरी नियन्त्रण के प्रयोग से रोजगार में स्थिरता, संयन्त्रों के प्रयोग में मितव्ययिता तथा अपव्ययों में कमी की जा सकती है जिसका लाभ सम्पूर्ण राष्ट्र को होगा।
उपर्युक्त विवेचन से स्पष्ट है कि बजटरी नियन्त्रण संस्था के सीमित साधनों के कुशलतन प्रयोग परिव्ययों में कमी और व्यावसायिक क्रियाओं में उत्तरोत्तर सुधार का साधन है। अतः व्यावसायिक संस्थाओं में इसे विलासिता न समझकर सफलता की कुन्जी समझना चाहिए।
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