मैथेटिक्स अभिक्रमण , अवस्थाएँ , विशेषताएँ

मैथेटिक्स अभिक्रमण , अवस्थाएँ , विशेषताएँ


सन् 1962 में थॉमस एफ. गिलबर्ट ने इस अभिक्रमण का विकास किया। इसका नामकरण यूनानी भाषा के शब्द 'मैथीन' के आधार पर किया गया है, जिसका अर्थ होता है सीखना। इस अभिक्रम में विषयवस्तु की अपेक्षा छात्र की अनुक्रिया को महत्व दिया जाता है। इसमें अभिक्रम की इकाई पद न होकर अभ्यास होती है। इसमें अनुक्रियाएँ अवरोही क्रम में होता हैं। अत: इसे अवरोही श्रृंखला अभिक्रमण कहते हैं। गिलबर्ट के अनुसार- 'मैथेटिक्स जटिल व्यवहार समूह के विश्लेषण और निर्माण के लिए पुनर्बलन के सिद्धांत का व्यस्थित प्रयोग है, जो विषय वस्तु पर पूर्ण अधिकार का प्रतिनिधित्व करता है। 


मैथेटिक्स अभिक्रमण की अवस्थाएँ


(1) प्रदर्शन- यह प्रथम अवस्था है इसमें अधिगम व्यवहार को प्रदर्शित किया जाता है।


(2) अनुबोधन - द्वितीय अवस्था में अधिगम व्यवहार उत्पन्न करने के लिए अनुबोधनों (prompts) एवं संकेतों (Cues) की व्यवस्था की जाती है। 


( 3 ) उन्मुक्ति- तीसरी अवस्था में छात्र द्वारा अधिगम व्यवहार के अभ्यासार्थ अवसर प्रदान किए जाते हैं।


मैथेटिक्स अभिक्रमण की प्रक्रिया


अधिगम के अन्तिम फ्रेम को छात्र के समक्ष अनुक्रिया हेतु प्रस्तुत किया जाता है। उचित अनुक्रिया के लिए अनुबोधकों और संकेतों को प्रस्तुत करते हैं। अन्त में छात्र प्रथम फ्रेम के प्रति अनुक्रिया करते हैं और अधिगम में निपुणता प्राप्त करते हैं।


मैथेटिक्स अभिक्रमण की विशेषताएँ


(1) इसमें अधिगम इकाई फ्रेम न होकर अभ्यास होती हैं।


(2) विषयवस्तु की अपेक्षा अनुक्रियाओं को अधिक महत्व दिया जाता है। 


(3) इसमें पाठ्यवस्तु पर अवरोही श्रृंखला में अनुक्रिया की जाती है।


(4) अभ्यास या समस्या समाधान छात्रों को पुनर्बलन प्रदान करता है।


मैथेटिक्स अभिक्रमण की सीमाएँ


(1) अभिक्रम का निर्माण कठिन कार्य है तथा कुशल शिक्षकों की आवश्यकता होती है। (2) सभी विषयों के शिक्षण हेतु उपयोगी नहीं है।


(3) छात्रों की व्यक्तिगत विभिन्नता के अनुरूप अनुदेशन की व्यवस्था नहीं होती है। ( 4 ) समय शक्ति व धन की दृष्टि से यह विधि मितव्ययी नहीं है।


अपनी प्रगति की जाँच करें।


6. मैथेटिक्स अभिक्रमण की विभिन्न अवस्थाओं का वर्णन कीजिए ।