शाखीय अभिक्रमण , प्रक्रिया , विशेषताएँ ,प्रकार - Branching Processes, Characteristics, Types
शाखीय अभिक्रमण , प्रक्रिया , विशेषताएँ ,प्रकार - Branching Processes, Characteristics, Types
शाखीय अभिक्रमण के प्रतिपादक नार्मन ए. क्राउडर थे। यह शिक्षण के अनेक सिद्धान्तों पर आधारित है। इसमें समस्त अनुक्रियाएँ छात्र द्वारा नियंत्रित होती हैं। अत: इसे आन्तरिक अभिक्रमण भी कहा जाता है। इस अभिक्रमण में छात्रों को विभिन्न पदों पर सीधी रेखा में आगे बढ़ने की बाध्यता नहीं होती, अपितु वह अपनी आवश्यकतानुसार विभिन्न पदों से होते हुए अंतिम पद तक पहुँचता है। शाखीय अभिक्रमण एक ऐसा कार्यक्रम है जो कंप्यूटर जैसे बाह्य युक्ति वाले माध्यम के बिना छात्रों की आवश्यकताओं के अनुरूप संचालित होता है।
शाखीय अभिक्रमण की प्रक्रिया
इसमें सर्वप्रथम छात्र को एक फ्रेम पढने के लिए दिया जाता है
जो एक पूर्ण पैराग्राफ या पृष्ठ के रूप में होता है। फ्रेम को पढ़ने के उपरांत दिये गये बहुविकल्पीय प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं। यदि छात्र द्वारा चयनित उत्तर विकल्प सही होता है तो वह अगले फ्रेम पर अध्ययन हेतु बढ़ता है। यदि उत्तर गलत होता है तो उसे उपचारात्मक श्रृंखला के अध्ययन हेतु निर्देश दिया जाता है । इस पृष्ठ को त्रुटि पृष्ठ कहते हैं। त्रुटि पृष्ठ पर अध्ययन के उपरांत पुनः मुख्य पृष्ठ पर उत्तर देना होता है। यह क्रिया तब तक चलती रहती है जब तक छात्र सही उत्तर नहीं देता है। इस अभिक्रम में सभी छात्र अपनी क्षमतानुसार अध्ययन करते हुए आगे बढ़ते हैं।
शाखीय अभिक्रमण की विशेषताएँ
1. पदों में अधिक शिक्षण सामग्री समाहित होती है।
2. प्रत्येक छात्र अपनी क्षमता के अनुसार अधिगम करते हुए आगे बढता है।
3. यह अभिक्रमण छात्र केंद्रित है एवं छात्र द्वारा नियंत्रित अभिक्रमण है।
4. इसमें निर्मित शिक्षण सामग्री पुस्तकों व शिक्षण मशीन दोनों में प्रयोग की जा सकती है।
5. इसमें फ्रेम अधिक स्पष्ट व बड़ा होता है।
6. इसमें गलत अनुक्रियाएँ अधिगम में बाधक नहीं होती है।
7. इस अभिक्रमण में अधिगम प्रक्रिया की अपेक्षा अधिगम उत्पाद को अधिक महत्व दिया जाता है।
शाखीय अभिक्रमण में प्रयुक्त पद
(1) शिक्षण
(2) अनुक्रिया
(3) निदान
शाखीय अभिक्रमण में प्रयुक्त फ्रेम के प्रकार
1. गृह पृष्ठ विषयवस्तु से संबंधित पूर्ण सूचना पद के रूप में प्रस्तुत होती है।
2. त्रुटि पृष्ठ गलत अनुक्रिया करने पर उपचारात्मक शिक्षण का प्रबंध किया जाता है।
शाखीय अभिक्रमण की सीमाएं
1. यह उच्च कक्षाओं हेतु ही प्रयोग की जा सकती है।
2. इस अभिक्रम के निर्माण हेतु कुशल व योग्य शिक्षकों की आवश्यकता होती है।
3. बहु-विकल्पीय प्रश्नों के उत्तर छात्र कई बार अनुमान से ही देते हैं।
4. यह अभिक्रम समय, शक्ति एवं धन की दृष्टि से मितव्ययी नहीं है ।
5. इसमें पूर्ण विषय वस्तु को समाहित करना कठिन होता है।
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