बजट समन्वय - budget coordination

बजट समन्वय - budget coordination


वर्तमान काल में प्रत्येक व्यावसायिक संस्था का कार्य बड़े पैमाने पर किया जाता है और व्यावसायिक क्रियाओं को कई उपक्रियाओं में बांटकर अलग-अलग निश्चित विभाग बना दिये जाते हैं, जैसे- क्रय विभाग, निर्माण विभाग, विक्रय विभाग, श्रम विभाग इत्यादि । व्यवसाय के सफल संचालन इन सभी विभागों में घनिष्ठतम सहयोग व सम्पर्क होना नितान्त आवश्यक है। उदाहरण के लिए, यदि विक्रय विभाग यह चाहता है कि विक्रय की मात्रा अधिकतम हो तो बिना निर्माण विभाग के सहयोग के उसकी इच्छा पूरी नहीं हो सकती। जब तक निर्माणी विभाग उत्पादन नहीं बढ़ायेगा, विक्रय में वृद्धि नहीं हो सकती है परन्तु निर्माणी विभाग उत्पादन तथा बढ़ा सकता है, जब उसे वित्त विभाग, क्रय विभाग व श्रम विभाग से सहयोग मिले। इस प्रकार हम देखते हैं कि व्यवसाय का कोई भी विभाग स्वतंत्र नहीं हैं। सभी एक स्थ के पहिये हैं और जब तक उनमें सहयोग की भावना नहीं होगी, तब तक व्यवसाय का संचालन ठीक नहीं होगा।


बजट के निर्माण में ठीक यही बात लागू होती है। प्रत्येक विभागाधिकारी अपने विभाग से सम्बन्धित बजट तैयार करता है। परन्तु उसका बजट उस समय तक शुद्ध व उचित नहीं हो सकता जब तक सभी विभागाधिकारी आपस में मिल-जुलकर कार्य न करें और आवश्यक सूचनाओं एवं आंकड़ों का आदान-प्रदान न करें। वास्तव में बजट का एक प्रधान उद्देश्य ही यह होता है कि व्यवसाय के सभी विभागों के बीच घनिष्ठ सम्बन्ध स्थापित किया जाये। बजट का निर्माण नियोजन का एक सघन है और इसके निर्माण में सभी विभागों के सहयोग की आवश्यकता पड़ती है। चूंकि बजट सहकारी प्रयासों का प्रतिफल होता है, अतः इसके विभिन्न अंगों में सन्तुलन होना आवश्यक होता है। यदि उनमें संतुलन नहीं है तो वे लाभदायक नहीं होंगे। उदाहरण के लिए, यदि किसी संस्था के विक्रय विभाग के पास बड़ी संख्या में आदेश आते हैं और विक्रय विभाग उनके आधार पर बजट तैयार करता है

तो वह विक्रय बजट तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक कि इन आदेशों के लिए पर्याप्त माल उसके पास न हो अर्थात् बजट का प्रभाव विक्रय बजट पर भी पड़ता है। अगर इन दोनों में समन्वय नहीं है, तो बजट असफल होगा। इसी प्रकार श्रम-पूर्ति व सामग्री पूर्ति में भी सन्तुलन होना आवश्यक है।


उपर्युक्त विवेचना से यह निष्कर्ष निकलता है कि एक विभागीय बजट बनाना तब तक सम्भव नहीं है जब तक कि व्यवसाय के शेष विभागों के लिए बजट न बनाया जाये अर्थात् बजट निर्माण में उचित समन्वय की आवश्यकता पड़ती है। यह समन्वय एक बजट अधिकारी के माध्यम से सम्पन्न हो पाता है। यह अधिकारी विभिन्न विभागाधिकारियों का एक संयुक्त सम्मेलन आयोजित करता है, जिसमें प्रत्येक विभागाधिकारी अपने विभागों को विवेकपूर्ण तर्कों को प्रस्तुत करता है। ब्रूएर व लजारस के शब्दों में, "बजट निर्माण एक व्यवसाय के विभिन्न विभागों की योजनाओं को समन्वित करता है तथा यह समन्वय विभिन्न विभागाधिकारियों के मध्य परामर्श द्वारा सम्भव होता है। ये परामर्श अनुमान पर नहीं, वरन् ठोस तथ्यों के विश्लेषण पर आधारित होते हैं ।"