बजट का निर्माण - budget formulation
बजट का निर्माण - budget formulation
भिन्न-भिन्न व्यवसायों के लिए बजट तैयार करने की विधियाँ अलग-अलग होती है। फिर भी बजट निर्माण की एक सामान्य रूपरेखा निर्धारित की जा सकती है। बजट निर्माण में निम्न कदम उठाये जा सकते हैं:
(1) नीति-निर्माण: बजट - निर्माण की आधारशिला व्यावसायिक नीतियां होती है। अतः बजट बनाते समय सबसे पहले व्यवसाय को विभिन्न क्रियाओं के सम्बन्ध में नीतियां निर्धारित करनी पड़ती हैं। ये नीतियां अधिकाशतः दीर्घकालीन योजनाएं होती हैं, जो विक्रय, उत्पादन, सकन्ध लागकत, पूंजी खर्चे व रोकड़, आदि से सम्बन्धित होती हैं। इस प्रकार की नीतियां अलग-अलग व्यवसायों में अलग-अलग होती हैं
और बहुत सीमा तक प्रबन्ध की कुशलता पर निर्भर करती है। वास्तव में यह कार्य प्रबन्ध का है न कि बजट समिति का।
(2) पूर्वानुमान की तैयारी : नीति निर्धारित करने के बाद, व्यवसाय की विभिन्न क्रियाओं के सम्बन्ध में पूर्वानुमान लगाये जाते हैं। इन व्यावसायिक पूर्वानुमानों में निन्म क्रियाओं से सम्बन्धित पूर्वानुमानों को शामिल करते हैं:
(अ) विक्रय पूर्वानुमान
(ब) उत्पादन
(स) स्कन्ध
(द) लागत
(य) नकद धन
(र) साख (देनदार व लेनदार)
(ल) क्रय
(व) पूंजीगत खर्च
(i) उत्पादन
(ii) विक्रय-वितरण
(iii) प्रशासन
(iv) अनुसन्धान व विकास
ये पूर्वानुमान केवल सम्भावना - मात्र होते हैं। इनकी तैयारी में अनेक विधियों का प्रयोग किया जा सकता है
(3) पूर्वानुमानों के वैकल्पिक संयोग की तुलना : पूर्वानुमान लगाने के बाद उनके वैकल्पिक संयोग की तुलना की जाती है। यह देखा जाता है कि किस पूर्वानुमान की सहायत से अधिकतम लाभ प्राप्त किया जा सकता है और साथ ही दीर्घकालीन वित्तीय स्थिरता भी बनाये रखी जा सकती है। अगर कोई मुख्य बजट कारक या ऐसा कारक है जो पूर्वानुमान को प्राप्त करने में बाधक हो सकता है, तो उसे दूर करने के उपाय के बारे में विचार किया जाता है। ऐसा करने के बाद जो सबसे अधिक लाभप्रद पूर्वानुमान होते हैं, उन्हें प्रयोग में लिया जाता है।
(4) बजट का निर्माण उपर्युक्त विधियों द्वारा जो पूर्वानुमान तैयार किये जाते हैं, उनको लिखित रूप में प्रस्तुत करने पर बजट तैयार हो जाता है। इन बजटों का प्रारूप क्या होता है, जिसे आगे समझाया गया है।
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