बजटिंग की सीमाएं - Budgeting Limitations
बजटिंग की सीमाएं - Budgeting Limitations
बजटिंग के उद्देश्य व लाभों का अध्ययन करने से पता चलता है कि बजटिंग प्रबन्ध के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण औजार है परन्तु प्रत्येक शास्त्र व ज्ञान की कुछ निजी मर्यादाएं एवं सीमाएं होती हैं और उन सीमाओं के अन्दर ही उनका प्रयोग लाभदायक होता है । बजटिंग भी सीमा-रहित औजार नहीं है। इसकी कुछ सीमाएं हैं और बजटिंग के प्रयोगकर्ता के लिए आवश्यक है कि वह इन सीमाओं से परिचित हो । बजटिंग की मुख्य सीमाएं अग्र प्रकार है:
(1) बजट योजना अनुमान पर आधारित होते हैं: बजट की सफलता या असफलता पर्याप्त सीमा तक आधारभूत अनुमानों की शुद्धता पर निर्भर करती है।
अतः अनुमानों की संगणना सभी प्राप्त तथ्यों के आधार पर करनी चाहिए। साथ ही यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि चूंकि बजट केवल अनुमान मात्र होते हैं, अतः उनके आधार पर कोई भी निर्णय उचित विवेचन के बाद ही लेना चाहिए।
(2) बजट योजना ऐसी होनी चाहिए जो बदलती परिस्थितियों में सतत रूप से प्रयोग की जा सकती हो : एक पूर्ण बजट योजना अल्पकाल में ही नहीं बनायी जा सकती। इसके लिए आवश्यक है कि बजट की विधियों को सतत रूप में व्यवसाय में प्रयोग किया जाये और संस्था के अन्तर्गत बदली हुई परिस्थितियों के अनुसार उनमें समायोजन किया जाये। इस क्रिया में विभिन्न विधियों का परीक्षण, उनमें सुधार या अन्य विधियों के द्वारा स्थानापन्न की आवश्यकता होती है। अतः जब तक सफल योजना न अपना ली जाये, व्यवसाय के अन्तर्गत हमेशा बजट शिक्षा की आवश्यकता पड़ सकती है।
(3) बजट योजना का कार्यान्वयन स्वचालित नहीं होता है: बजट योजना के पूर्ण होने पर यह आवश्यक होता है कि प्रत्येक अधिकारी उसके प्रति उत्तरदायित्व अनुभव करे और उसको पूरा करने के लिए अथक प्रयत्न करे। विभागाध्यक्ष को सोचना चाहिए कि उसके विभाग से सम्बन्धित बजट में जो लक्ष्य प्रतिपादित किये गये हैं उन्हें पूरा करना और अच्छा बनाना उसका निजी उत्तरदायित्व है। व्यवसाय के सभी वर्गों में बजट के प्रति सहानुभूति होनी चाहिए।
( 4 ) बजट प्रबन्ध का स्थान नहीं ले सकता है: यह हमेशा ध्यान में रखना चाहिए कि बजट प्रशासन का स्थापापन्न नहीं है बल्कि यह प्रबंध के लिए औजार है। यह तो केवल एक उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए साधन मात्र है और उसका प्रयोग साधन के रूप में ही होना चाहिए। बजट को मालिक के रूप में नहीं बल्कि नौकर के रूप में मानना चाहिए तभी उसका अधिकतम लाभ व्यवसाय को प्राप्त हो सकता है।
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