बजटिंग के उद्देश्य - budgeting objectives
बजटिंग के उद्देश्य - budgeting objectives
बजटिंग का मुख्य उद्देश्य प्रबन्ध को उसकी मुख्य क्रियाओं, जैसे नियोजन, नियन्त्रण व समन्वय में सहायता पहुंचाना है। इस तथ्य पर प्रकाश डालते हुए जॉन जी. ग्लोवर और कॉलमैन आई. माजै ने लिखा है कि "बजट का मुख्य उद्देश्य नियोजन एवं संस्था की क्रियाओं को समय-समय पर नियन्त्रित करने में सहायता देना होता है। यह मुख्यतः संवहन का श्रेष्ठ साधन होता हैं और प्रबन्ध के लिए आवश्यक उपकरण माना जाता है।" एक बजट विधि प्रकार यह सहायता पहुंचाती है,
(1) बजटिंग और नियोजन नियोजन में उद्देश्यों का निर्धारण व उनकी प्राप्ति के लिए उचित संगठन का निर्माण शामिल होता है। उद्देश्यों में पूरे व्यवसाय व प्रत्येक उपविभाग के लिए दीर्घकालीन व अल्पकालीन योजनाएं शामिल होती है। नियोजन के बाद यह आवश्यक होता है कि उत्पादन के साधनों का ऐसा संगठन किया जाये ताकि नियोजित प्रतिफल प्राप्त हो सके ।
बजटिंग के सम्बन्ध में नियोजन का अर्थ ऐसी मदों (जैसे विक्रय, विज्ञापन, उत्पादन, स्कन्ध, सामग्री की लागत व आवश्यकता, श्रम की लागत व आवश्यकता, खर्चे, अनुसन्धान, पूंजीगत खर्चे, वित्तीय योजना इत्यादि) के सम्बन्ध में बजट बनाने से होता है।
यह कहना आवश्यक नहीं है कि एक सफल व्यावसायिक संस्था के लिए पूर्व-निश्चित उद्देश्य व योजना अपरिहार्य है। संस्था को एक दीर्घकालीन उद्देश्य निश्चित करना पड़ता है अर्थात् यह निश्चित करना पड़ता है कि संस्था उसी उद्योग में हो तो पांच वर्षों के बाद स्थिति क्या होगी। इस दीर्घकालीन योजना को अल्पकालीन योजना अर्थात् बजट के रूप में लाया जा सकता है। पुनश्च: इस वार्षिक उद्देश्य को और अल्पावधि जैसे माह, तिमाही या छमाही रूप में बांटा जा सकता है।
परन्तु प्रश्न यह उठता है कि क्य संस्था बिना बजट के योजना नहीं बना सकती है? यह सत्य है कि बहुत सी संस्थाएं प्रभावशाली योजनाएं बिना औपचारिक बजट के तैयार करती है परन्तु यह प्रमाणित सत्य है कि संक्षिप्त नियोजन में प्रदत्त क्रियाओं से वंचित रहना मानव कमजोरी है। बजट एक ऐसी महत्वपूर्ण विधि है, जो प्रबन्ध के सभी स्तरीय प्रबन्धकों को योजना कार्य के प्रति गम्भीर और सामयिक ध्यान देने के लिए बाध्य करती हैं। यह तथ्य कि योजनाओं और उद्देश्यों को लिखित रूप में सभी लोगों को देखने हेतु प्रस्तुत किया गया है, लोगों का ध्यान सावधानीपूर्वक आकर्षित करता है। बजट के द्वारा नियोजन करने में संस्था के सभी अंग सहकारिता के रूप में आ जाते हैं जो वे नियोजन के प्रति गम्भीरता से सोचने के लिए बाध्य हो जाते हैं। बजट के द्वारा संस्था के अधिकारियों का दृष्टिकोण संकुचित न होकर व्यापक हो जाता है। वे न केवल किसी विभाग के बारे में ही सोचते हैं, बल्कि प्रत्येक कार्य को समस्त व्यवसाय के हित को ध्यान में रखते हुए करते हैं।
(2) बजटिंग तथा समन्वय समन्वय एक ऐसी विधि है जिसके द्वारा अन्य उपरिव्ययों की उपेक्षा किये बिना, प्रत्येक विभाग सामान्य उद्देश्य की पूर्ति के लिए कार्य करता है और इनके प्रयत्नों में एकता की भावना होती है, संस्था के विभिन्न विभागों में समन्वय की आवश्यकता पड़ती है। इस समन्वय को सफलतापूर्वक रखने के लए बजट का काफी महत्त्वपूर्ण स्थान होता है। चूंकि बजट का निर्माण करते समय सभी विभागों के उद्देश्य, समस्या व सम्भावना को ध्यान में रखा जाता है और प्रत्येक विभागधिकारी को बजट निर्माण में सक्रिय भाग लेना पड़ता है, अतः समन्वय के लिए आधारभूत तत्वों का स्थापन हो जाता है। साथ ही समन्वय अधिकांश सीमा तक पर्याप्त संवहन विधि पर निर्भर करता है । यह महत्वपूर्ण होता है कि प्रबन्ध के प्रत्येक सदसया को (ऊपर से लेकर नीचे तक) पूर्ण ज्ञान हो कि योजना क्या है और कैसे, कब और किसके द्वारा यह पूरी की जायेगी। यह कार्य भी बजट द्वारा ही पूरा किया जा सकता है।
योजना को बजट के रूप में तैयार करके सभी सदस्यों में बाँटा जा सकता है। कहने का तात्पर्य यह है कि बजट संवहन का एक साधन है जो समन्वय के लिए बहुत ही आवश्यक है। समन्वय के आधारभूत तत्वों को स्थापित करने के अलावा, बजट इसे सतत रूप प्रदान करता है, अर्थात् बजट के द्वारा यह भी देखा जा सकता है कि प्रबन्ध के सदस्य सहकारिता के साथ कार्य कर रहे हैं या नहीं।
(3) बजटिंग और नियंत्रण नियन्त्रण द्वारा यह आश्वासन मिल जाता है कि योजनाओं और उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए ठीक ढंग से क्रियाएं की जा रही है या नहीं। जब नियन्त्रण की क्रिया का बजट से सम्बन्ध स्थापित करते हैं, तो इसे बजटरी कण्ट्रोल कहते हैं। इस रूप में नियन्त्रण का अर्थ ऐसे नियमबद्ध प्रयत्न से होता है, जिसके द्वारा प्रबन्ध को पता चलेगा कैसे कि पूर्व निर्धारित लक्ष्य, योजना व नीति के अनुसार कार्य हो रहा है या नहीं। नियन्त्रण में मापन की क्रिया निहित होती है और इसके लिए किसी-न-किसी मापदण्ड की आवश्यकता पड़ती है और यह मापदण्ड बजटिंग द्वारा प्रदान किया जाता है। एक बजट कई प्रकार से नियन्त्रण को सम्भव बनाता है। वास्तविक परिणाम की बजटेड रकम से तुलना करके दोनों के अन्तर का विश्लेषण किया जाता है और अन्तर के कारणों की खोज की जाती है। बजट के आधार पर प्रबन्ध न केवल वर्ष के अन्त में बल्कि पूरे वर्ष के दौरान वार्षिक क्रियाओं के फल की जांच कर सकता है और उन पर नियन्त्रण कर सकता है। प्रत्येक समय प्रबन्ध यह ज्ञात कर सकता है कि कहां पर सन्तोषजनक उन्नति हो रही है और कहां पर नहीं । तदनुसार सुधारात्मक कदम भी उठाये जा सकते हैं।
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