व्यावसायिक बजट तथा बजटिंग - Business Budget and Budgeting
व्यावसायिक बजट तथा बजटिंग - Business Budget and Budgeting
किसी भी व्यावसायिक संस्था की लाभदायकता व षोध्यक्षमता बनाये रखने के लिए उसके प्रबन्ध को भावी वित्तीय आवष्यकताओं के सम्बन्ध में योजना बनानी होती है। भावी वितीय आवष्यकताओं से सम्बन्धित में योजना बनाने की विधि को ही बजटिंग कहते हैं और योजना को आपैचारिक ढंग से लिखित रूप में प्रस्तुत करने पर 'बजट' कहते हैं। वस्तुतः (व्यावसायिक परिस्थितियों के सम्बन्ध में प्रयोग करने पर) बजटिंग का अर्थ बजट योजना व तैयारी, बजटरी कण्ट्रोल व अन्य सम्बन्धित विधियों से होता है । बजटिंग वास्तव में एक प्रबन्धकीय विधि है और एक व्यापारिक बजट ऐसी लिखित योजना है, जिसमें भविश्य की एक निष्चित अवधि के सम्बन्ध में व्यवसाय संचालन के सभी पहलुओं को षामिल किया जाता है। यह किसी संस्था के उच्चस्तरीय प्रबन्ध द्वारा भविश्य में अपनायी गयी नीति, योजना, उदेष्य और गन्तव्य का औपचारिक कथन मात्र है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि बजट एक औजार है, जो प्रबन्ध द्वारा भावी क्रियाओं के सम्बन्ध में योजना बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है।
यह एक साधन है जिसके आधार पर प्रबन्ध एक निष्चित अवधि के लिए ( मासिक, त्रैमासिक, अर्धवार्षिक, वार्षिक पंचवर्षीय) अपने क्रियाकलाप का नियोजन करता है। इसके अन्तर्गत विक्रय, उत्पादन और किये जाने वाले खर्चों का पूर्वानुमान षामिल होता है। साथ ही उस अवधि की आवष्यकताओं - कार्यषील पूंजी, भवन, मषीन, सामग्री तथा श्रम, आदि को भी ध्यान में रखा जाता है हेरी एल, विल के षब्दों में "बजट निर्मित उत्पाद हैं- वे भावी संचालन क्रियाओं व अनुमानित परिणामों के औपचारिक प्रोग्राम होते हैं। बजट वास्तव में भावी दूरदर्षिता व योजना के परिणाम होते हैं।" बारटीजल ने बजट को इस प्रकार परिभाषित किया है," किसी व्यावसायिक संस्था की उच्चतम दक्षता स्तर पर निर्धारित संचालन क्रियाओं के अधिकृत योजना से सम्बन्धित विस्तृत पूर्वानुमान को बजट कहते हैं। इस परिभाषा में प्रयुक्त उच्चतम दक्षता स्तर क्या होना चाहिए, यह एक प्रबन्ध नीति का विषय है परन्तु एक पूर्वानुमान कभी भी बजट के रूप में नहीं माना जा सकता है, जब विह इस बात से सम्बन्धित नहीं है कि बदलती हुई अवस्थाओं के साथ उसे भी सुधारा या परिवर्तित किया जा सकता है।
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