गणनावाचक दृष्टिकोण - Cardinal Approach
गणनावाचक दृष्टिकोण - Cardinal Approach
यद्यपि उपयोगिता एक मनोवैज्ञानिक विचार है परन्तु मार्शल तथा अन्य अर्थशास्त्रियों के अनुसार उपयोगिता को मोटे रूप से मुद्रारूपी पैमाने द्वारा मापा जा सकता है। एक व्यक्ति किसी वस्तु के लिए उपयोगिता के हिसाब से क़ीमत चुकाता है। यदि उपयोगिता अधिक होती हैं तो कीमत अधिक चुकाई जाती है। इसी प्रकार उपयोगिता कम होने पर कम कीमत चुकाई जाती है। स्पष्टशब्दों में, किसी वस्तु के लिए दी जाने वाली कीमत उस वस्तु की उपयोगिता का माप है। उदाहरणार्थ, एक व्यक्ति एक फाउण्टेन पैन के लिए 8 रूपये देने को तैयार तो उसके लिए पैन की उपयोगिता 8 रूपये के बराबर होगी। पैन के सम्बन्ध में यह 8 ही उपयोगिता की माप है।
इस प्रकार उपयोगिता मापनीय है। यहाँ उपयोगिता के लिए विभिन्न प्रकार की संख्यायें (1,2,3,4 इत्यादि) प्रदान कर दी जाती हैं।
इस संख्याओं को गणनावाचक संख्याएँ कहते हैं। इस संख्याओं को जोड़ा व घटाया जा सकता है जैसे किसी वस्तु की पहली इकाई से 6 के बराबर उपयोगिता प्राप्त होती है, दूसरी इकाई से 4 के बराबर व तीसरी इकाई से 2 के बराबर उपयोगिता मिलती है, तो इस प्रकार वस्तु की तीनों इकाईयों से कुल 12 इकाई के बराबर उपयोगिता प्राप्त होगी ।
यहाँ चूँकि उपयोगिताओं को गणनावाचक संख्याएँ प्रदान कर दी जाती है अतः इस दृष्टिकोण कहते हैं। उपयोगिता को निम्न दो भागों में बाँटा जा सकता है
(1) सीमान्त उपयोगिता (Marginal Utility)
(2) कुल उपयोगिता (Total Utility)
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