रोकड़ धारण करने के उद्देश - cash holding purpose
रोकड़ धारण करने के उद्देश - cash holding purpose
यहां पहला प्रश्न यह पैदा होता है कि फर्म नकद कोष क्यों रखती हैं या क्यों रखना चाहती हैं। फर्म को नकद-कोषों के अनुकूलतम शेषों को भी निश्चत करना चाहिए। अधिक शेष रखने पर होने वाली लागतों तथा कम शेष रखने पर होने वाली हानियों का संतुलन करके ही प्रबन्धक लोग अनुकूलतम शेष की सीमा निश्चित कर सकते हैं।
किसी भी फर्म द्वारा नकदी का समुचित शेष या कोष रखने के पीछे निम्न तीन मुख्य उद्देश्य होते हैं-
1. व्यापार सम्बन्धी आवश्यकतायें (Transaction Motives) व्यापार सम्बन्धी आवश्यकताओं का अभिप्राय नकद कोषों के इस महत्वपूर्ण उद्देश्य से है जो फर्म को अपना व्यापार नियमित रूप से चलाने में मदद देता है। दूसरे शब्दों में, इसका अर्थ यह है कि फर्म को माल का क्रय विक्रय करने तथा अन्य खर्चों का भुगतान करने के लिये नियमित रूप से रोकड़ की आवश्यकता होती है।
अतः इन प्रतिदिन होने वाले खर्चों को पूरा करने के लिए नकदी रखना आवश्यक है। यदि फर्म के प्रबन्धक अपनी आय व अपने व्ययों का सारणीयन करने में सफल हो जाते हैं तो वे कम नकदी से भी काम चला सकते है। उदाहरणार्थ एक जन हितार्थ व्यावसायिक संस्था (public utility concern) में, जहां कि देय बिलों का भुगतान एक निश्चित अवधि के बाद होता है, कम नकदी से काम चल जाता है। इसके विपरित एक खुदरा व्यापार में कुल बिक्री की अनुपात में अधिक नकदी की आवश्यकता होती है।
(2) पूर्व-विचार सम्बन्धी आवश्यकतायें (Precautionary Motive)- नकद-कोष रखने के पीछे दूसरा मुख्य प्रयोजन आशा से परे ( unexpected) – आकस्मिकताओं का सामना करना भी हो सकता है। प्रायः किसी उपक्रम को ऐसी आकस्मिकता का सामना करना पड़ सकता है जिनके सम्बन्ध में पहले से न सोचा गया हो और न जिनके लिये वित्तीय आयोजन ही किया गया हो।
ऐसी आकस्मिकताओं में हड़ताल, तालाबन्दी, आग लग जाना, कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना तथा अप्रचलन आदि को सम्मिलित किया जा सकता है। जो फर्म पर्याप्त नकद कोष रखती है वे ही इन आकस्मिकताओं का सफलतापूर्वक सामना कर सकती हैं।
(3) परिकल्पनात्मक आवश्यकतायें ( Speculative Motives) कुछ व्यावसायिक संस्थाये परिकल्पना से लाभ कमाने के उद्देश्य से भी नकद-कोष रखती है। इसका मुख्य ध्येय भविष्य में मूल्य-स्तर में होने वाले परिवर्तनों से लाभ कमाना होता है। उदाहरणार्थ, यदि फर्म को किसी समय कच्चा माल सस्ता मिल रहा हो तो वह अधिक क्रय करने का विचार कर सकती है। इसी प्रकार यदि भविष्य में अपने उत्पाद का मूल्य व माग काफी बढ़ने की आशा हो तो अधिक उत्पादन करके रख सकती है। इन दोनों ही परिस्थितियों में उसका उद्देश्य परिकल्पना है लेकिन दोनों ही परिस्थितियों में उसे अधिक नकदी की आवश्यकता होगी।
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