संस्कृति में परिवर्तन - change in culture

संस्कृति में परिवर्तन - change in culture


संस्कृति का रोचक पक्ष है उसका विकास व उसमें बदलाव, जैसे कि कोई सत्य या प्रत्यय स्थायी नहीं होता, संस्कृति भी उत्क्रान्त होती है। यहाँ विकास व बदलाव हमेशा एक जैसे नहीं होते या हमेशा एक रूप में नहीं आतें है। उदहारण के लिए हिंदी भाषा भारतेंदु हरिश्चन्द्र के समय पर, आज की आधुनिक हिंदी से कुछ अलग थी. जैसे सभ्यता का विकास होता है व उसमें बदलाव आता है वैसे ही उस बदलाव का असर उक्त संस्कृति पर भी आता है। यह बदलाव आता है विसरण, संस्कृति संक्रमण, संस्कृति विस्तार, समाजीकरण या फिर उत्संस्करण द्वारा।


1 ) विसरण - संस्कृति विसरण वह प्रक्रिया है जहाँ संस्कृति समिष्ट व संस्कृति लक्षण एक स्थान से संचार के माध्यम से दूसरे स्थान तक पहुँचते है, यहाँ उस संस्कृति का विसरण होता है जो सभ्यता के रूप में ज़्यादा विकास का क्रम ले चुकी हो।


2) संस्कृति - विस्तार (Transculturation ) - जहाँ दो या उससे अधिक संस्कृतियां आपस में लक्षणों का आदान-प्रदान करती है, उस स्थिति को संस्कृति विस्तार कहते है।


3) संस्कृति-संक्रमण (Enculturation ) - वह प्रक्रिया है जिससे मनुष्य अपने या दूसरे समाज कि आधारभूत संस्कृति, जैसे- समाज के विभिन्न व्यवहार, रीति-रिवाज़, गतिविधियाँ इत्यादि को सीखता है। 


4) सामाजीकरण (Socialization) - सामाजीकरण का अर्थ उस प्रक्रिया से है जिसके द्वारा व्यक्ति अन्य व्यक्तियों से अंतः क्रिया करता हुआ सामाजिक आदतों, विश्वासों, रीति-रिवाजों तथा परंपराओं एवं अभिवृत्तियों को सीखता है। इस क्रिया के द्वारा व्यक्ति जन कल्याण की भावना से प्रेरित होते हुए अपने आपको अपने परिवार, पड़ोस तथा अन्य सामाजिक वर्गों के अनुकूल बनाने का प्रयास करता है जिससे वह समाज का एक श्रेष्ठ, उपयोगी तथा उत्तरदायी सदस्य बन जाए।


5) उत्संस्करण (Acculturation ) वह प्रक्रिया है जिसमें कोई व्यक्ति या समूह किसी दूसरे संस्कृति जिसके वे प्रत्यक्ष संपर्क में आतें है, उसके लक्षण व विशेषताओं का अधिग्रहण करते है। उत्संस्करण में प्रभावी संस्कृति गौण संस्कृति को काफी हद तक बदल देती है, जिससे उसे आचार-व्यवहार, खान-पान पहनावा व बोलने- समझने के तरीके इत्यादि भी बदल जातें हैं।