किशोरावस्था में बालक का चारित्रिक विकास - Character development of the child in adolescence

किशोरावस्था में बालक का चारित्रिक विकास - Character development of the child in adolescence


1) एक आदर्श व्यक्ति की कल्पना करके उसके समान बनने का प्रयास करता है।


(2) किशोर अपने समूहपरिवार और पड़ोस के व्यक्तियों से सामंजस्य स्थापित करने में कठिनाई का अनुभव करता है।


3) वैयक्तिक, सामाजिक, नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों का निर्माण करता है एवं दूसरे व्यक्तियों से बात करके अपने दृष्टिकोण की तुलना करता है।


(4) किशोर, धर्म की संकीर्णता को त्यागकर सहिष्णुता और मानवधर्म का समर्थन करता है। 


5) मुख्य चारित्रिक विशेषताएँ - चिंता, उच्च आदर्श, शक्तिशाली कल्पना, आत्माभिमान, स्वतन्त्रता के प्रति प्रेम, धार्मिक रीति-रिवाजो में अविश्वास, चंचलता।