अभिप्रेरित व्यवहार की विशेषताएँ - characteristics of motivated behavior

अभिप्रेरित व्यवहार की विशेषताएँ - characteristics of motivated behavior


• इस अभिप्रेरित व्यवहार के मूल में जो शक्ति पुंज या शक्ति स्रोत होता है, वह किसी-न-किसी प्रकार का कोई-न-कोई अभिप्रेरक ही होता है।


• किसी-न-किसी प्रकार की मूलभूत आवश्यकताओं को संतुष्ट करने का ही लक्ष्य इस व्यवहार का होता है।


• व्यवहार को प्रारंभ करना तथा लक्ष्य प्राप्ति हेतु उसे गति प्रदान करते रहना भी ऐसे व्यवहार की प्रमुख विशेषता है।


• अभिप्रेरित व्यवहार चयनात्मक होता है, वातावरण में उपस्थित किसी उद्दीपन के प्रति कैसी अनुक्रिया की जाए, इसका उपयुक्त चयन इस आधार पर किया जाता है कि उससे सम्बंधित आवश्यकताओं की उचित ढंग से पूर्ति होती रहे।


• अभिप्रेरित व्यवहार परिवर्तनशील भी होता है। व्यक्ति की एक इच्छा या आवश्यकता पूरी होने पर दूसरी सामने आ सकती है तथा अब इसकी आवश्यकता की पूर्ति का लक्ष्य सामने आ सकता है। परिणामस्वरूप अभिप्रेरक तथा अभिप्रेरणा की प्रकृति भी बदलना आवश्यक हो जाता है और अभिप्रेरित व्यवहार के स्वरूप और दिशा में भी परिवर्तन आ सकता है।


• अभिप्रेरित व्यवहार लक्ष्य निर्देशित होता है। किसी एक निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति में ही अभिप्रेरित व्यक्ति जुटा रहता है, परन्तु ऐसे किसी लक्ष्य की प्राप्ति उसके अभिप्रेरित व्यवहार को नाममात्र का ही विराम देती है, क्योंकि वह फिर अपने नए लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अभिप्रेरित रहना प्रारम्भ कर देता है। इसी को मनोविज्ञान की भाषा में जैसा कि हम आगे जानेंगे, अभिप्रेरणात्मक चक्र का नाम दिया जाता है।


• अभिप्रेरित व्यवहार हमें अपने जीवन में संतुलन लाने एवं समायोजित होने में सार्थक ढंग से मदद करता है। आवश्यकताओं का जन्म, उनकी संतुष्टि के लिए किया गया व्यवहार तथा आवश्यकताओं की पूर्ति इस पूरी प्रक्रिया में अगर तालमेल बना रहता है तो हम अपने आपको समायोजित अनुभव करते हैं और अभिप्रेरित व्यवहार निःसंदेह इस प्रकार के संतुलन और समायोजन में पूरी-पूरी सहायता करता है।