एक भली भांति समायोजित व्यक्ति की विशेषताएं - Characteristics of a Well Adjusted Person

एक भली भांति समायोजित व्यक्ति की विशेषताएं - Characteristics of a Well Adjusted Person


एक भली भांति समायोजित कहे जाने वाले व्यक्ति के व्यक्तित्व व व्यवहार में निम्न विशेषताएं पायी जाती हैं-


1. शारीरिक दृष्टि से समायोजित


शारीरिक रूप से व्यक्ति अगर स्वस्थ हो तथा उसका शारीरिक विकास, भार उंचाई, अंग प्रत्यंगों का विकास आदि अपनी आयु के अनुसार सामान्य ढंग से चलता रहे तो उसे अपने आप से तथा अपने वातावरण के साथ समायोजन करने में बहुत सुविधा होती है। समायोजित कहे जाने वाले बालक में शारीरिक स्वास्थ्य एवं विकास संबंधी विशेषता पायी जाती है। 


2. संवेगात्मक रूप से समायोजित


एक समायोजित व्यक्ति का संवेगात्मक व्यवहार काफी संतुलित होता है

वह अपने संवेगों की उचित अभिव्यक्ति को उचित ढंग से सीख लेता है । किस तरह कितनी मात्रा में किस प्रकार के संवेगों की अभिव्यक्ति की जाए, इस प्रकार की व्यवहार कुशलता तथा संवेगात्मक नियंत्रण की उपस्थिति उसमें पायी जाती है।


3. अपनी अच्छाईयों तथा कमजोरियों का ज्ञान 


भली भांति समायोजित व्यक्ति यह जानता है कि उसकी अपनी योग्यताओं तथा क्षमताओं का क्या स्तर है। किन बातों में वह आगे है तथा किन में पीछे। अपने आपको इस प्रकार तौलकर ही वह आगे बढता है और इसलिए न तो वह जो नहीं कर सकता था उसे करके निराश होता है और न जो वह कर सकता था उसे न करके पछताता रहता है। 


4. अपने आपको पर्याप्त सम्मान देना तथा दूसरों को भी सम्मान देना 


भली भांति समायोजित व्यक्ति जो कुछ भी अपने व्यक्तित्व में होता है उससे संतुष्ट रहने का प्रयत्न करता है । तथा अपने आत्म का भी सम्मान करता है। जैसा कि रंग रूप, कद काठी, योग्यताएं तथा क्षमताएं उसके पास होती है उन्हीं को अपनी शक्ति मानकर उनकी कद्र करता है तथा जो कुछ भी नहीं है उसकी दूसरों से तुलना कर व्यर्थ में रोना नहीं रोता और न इसके लिए अकारण ही परेशान होता है। अपने आत्म का सम्मान करते हुए दूसरों को पर्याप्त सम्मान देने का प्रयत्न करता है।


5. सामाजिक रूप से समायोजित


एक भली भांति समायोजित व्यक्ति सामाजिक विकास तथा सामाजिकता की दृष्टि से अपनी आयु के अनुसार ठीक प्रगति करता है।

दूसरे बच्चों के साथ खेलने, मित्रता बढ़ाने तथा सामाजिक क्रियाओं में भाग लेने में उसकी रूचि होती है। धीरे धीरे वह समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को समझने लगता है अपने सामाजिक परिवेश को अच्छी तरह पहचानने की क्षमता आ जाती है तथा अच्छा सामाजिक जीवन बिताने से संबंधित गुणों और कुशलताओं के अर्जन की ओर वह कदम बढ़ाने लगता है। 


6. महत्वाकांक्षा का उचित दर


जीवन में बहुत कुछ पाना तो सभी चाहते हैं परंतु समझदारी इसी में होती है अपनी महत्वकांक्षाओं को में अपनी योग्यताओं, सीमाओं तथा परीस्थितियों के संदर्भ में ही संतुलित करके रखा जाए। एक समायोजित व्यक्ति इसी प्रकार का संतुलन बनाए रखने का प्रयत्न करता है और इसलिए अनावश्यक, चिंता, परेशानी तथा निराशा के शिकार होने से बच जाता है। 


7. मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति


मूलभूत शारीरिक मनोवैज्ञानिक तथा सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति किसी भी व्यक्ति के समायोजन के लिए काफी आवश्यक मानी जाती है। अगर किसी कारण किसी आवश्यकता की पूर्ति में कोई कमी रहती भी है तो उसकी चुभन को दूसरे वर्ग की आवश्यकताओं की पूर्ति से पूरा किया जाता रहता है। गरीबी तथा अभावों की चुभन को स्नेह प्यार के मरहम तथा सुरक्षा के कवच से कम किया जा सकता है। भली भांति समायोजित व्यक्ति के साथ यही होता है या तो उसकी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति में कोई बाधा नहीं आती और अगर आती भी है तो उसकी उन्हें भविष्य में पूरा होने की आशा बंधी रहती है।


8. आलोचक तथा दोष निकालने की प्रकृति का नहीं होना


एक समायोजित व्यक्ति स्वभाव से दूसरों में उनकी अच्छाइयों के ही दर्शन करता है उनकी बुराइयों तथा दोषों को ढूंढकर उनका प्रचार नहीं करता


9. व्यवहार का लचीलापन


समायोजित व्यक्ति का रूख व्यवहार तथा दृष्टिकोंण अड़ियल टट्टू की तरह नही होता। जिस तरह का माहौल या परिस्थितियां होती है उन्हीं के अनुसार अपने स्वभाव तथा कार्यशैली में परिवर्तन लाने की पर्याप्त क्षमता पायी जाती है।


10. अपने वातावरण संबंधी हालातों से संतुष्टि


अपने घर, परिवार पास-पड़ोस, विद्यालय में उसे जो भी परिस्थितियां और माहौल, उसके रहन-सहन, लालन-पालन,खेल कूद, मनोरंजन, तथा शिक्षा के लिए मिलता है उसमें वह संतुष्टि का अनुभव करता है

तथा बिना वजह किसी अभाव का रोना नहीं रोते रहता जो भी काम वह जहां भी करता है और जिनके संपर्क में आता है उससे कोई भी शिकायत या गिले शिकवे करते नहीं पाया जाता।


11. हालातों से संघर्ष करने की क्षमता


अनुकुल परिस्थितियों में तो सभी जी लेते हैं और संतुष्टि का अनुभव सभी कर लेते हैं परीक्षा तो विपरीत परिस्थितियों में ही होती है इस प्रकार की परिस्थितियों से समझौता करने के लिए पर्याप्त धैर्य रखने के साथ साथ समायोजित व्यक्ति में भी यह विशेषता पाई जाती है कि वह हालातों का मुकाबला कर उन्हें अपने अनुकुल बना डालने के लिए भी कमर कस कर खड़ा हो जाए। उसकी संकल्प तथा इच्छा शक्ति प्रबल होती है अतः वह प्रतिकूल परिस्थितियों में भी विचलित नहीं होता।