किशोरावस्था में बच्चे का मानसिक विकास - child development in adolescence
किशोरावस्था में बच्चे का मानसिक विकास - child development in adolescence
1) मानसिक विकास 15 से 20 वर्ष की आयु में अपनी उच्चतम सीमा पर पहुँच जाता है।
2) किशोरावस्था में बुद्धि का अधिकतम विकास हो जाता है।
3) रूढ़ियों, रीति-रिवाजों, अंधविश्वासों और पुरानी परम्पराओं को अस्वीकार करके स्वतन्त्र जीवन व्यतीत करने का प्रयास करता है।
4) मानसिक योग्यताओं का स्वरूप निश्चित हो जाता है। उसमें सोचने समझने, विचार करने, अन्तर करने और समस्या का समाधान करने की योग्यताएँ उत्पन्न हो जाती है।
(5) किशोर में ध्यान केन्द्रित करने की क्षमता का पर्याप्त विकास हो जाता है। किसी विषय या वस्तु पर अपने ध्यान को बहुत देर तक केन्द्रित रख सकता है।
6) किशोरों में चिन्तन करने की शक्ति होती है। इसकी सहायता से वह विभिन्न प्रश्नों और समस्याओं का हल खोजता है।
7) तर्क शक्ति एवं कल्पना शक्ति का पर्याप्त विकास हो जाता है। वह कल्पना की दुनिया में खोया रहता है।
8) रुचियों का विकास बहुत तीव्र गति से होता है। बालकों और बालिकाओं में कुछ रुचियाँ समान और कुछ भिन्न होती हैं।
समान रुचियाँ :- भाबी जीवन और भावी व्यवसाय में रूचि, सिनेमा देखना, गाने सुनना, प्रेम साहित्य पढना। विभिन्न रुचियाँ बालिकाओं में सुन्दर बनने संगीत, नृत्य, नाटक करने बालक को खेलने में, स्वास्थ्य में आदि।
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