शैशवावस्था में बच्चे में संवेगात्मक विकास - child emotional development in infancy
शैशवावस्था में बच्चे में संवेगात्मक विकास - child emotional development in infancy
1) शिशु जन्म के समय से ही संवेगात्मक व्यवहार की अभिव्यक्ति करता है, शिशु का रोना, चिल्लाना और हाथ पैर पटकना इसका प्रमाण है।
2) शिशु में संवेगात्मक व्यवहार अत्यधिक अस्थिर होता है। उसका संबेग कुछ ही समय के लिए रहता है। (उदाहरण:- रोता हुआ शिशु खिलौना पाकर तुरन्त रोना छोड़कर हँसने लगता है)।
3) संवेगात्मक विकास में क्रमशः परिवर्तन होता है।
तीन वर्ष की आयु में शिशु में अपने साथियों के प्रति प्रेम का विकास हो जाता है। दो वर्ष की आयु होने पर उसमें भय का धीरे धीरे विकास आरंभ होता है।
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