अश्वेत नारीवाद की अवधारणा - concept of black feminism
अश्वेत नारीवाद की अवधारणा - concept of black feminism
अश्वेत नारीवाद की विवेचना करने से पहले हमें 'श्वेत और अश्वेत को समझना होगा। 17वीं सदी में अमेरीका में उद्योग, व्यापार और आर्थिक विकास के लिए अफ्रीकी देशों के नागरिकों को दास के रूप में लाया गया। शुरू में इन अश्वेत दासों को सिर्फ गुलाम के रूप में कार्य करने की अनुमति थी, लेकिन कालांतर में विभिन्न आंदोलनों के द्वारा दास प्रथा का संवैधानिक रूप से अंत हो गया। दास प्रथा के संवैधानिक रूप से उन्मूलन होने के बाद भी श्वेत लोगों का अश्वेतों से दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाना जारी रहा। तत्कालीन परिवेश में अश्वेत समुदाय की स्त्रियों की दशा और भी दयनीय थी। पश्चिम के नारीवादी आंदोलनों और नागरिक अधिकार आंदोलनों में पर्याप्त भागीदारी के पश्चात भी जब अश्वेत स्त्रियों से जुड़े मुद्दों को नज़रअंदाज किया जाने लगा तब एक ऐसे आंदोलन की जरूरत महसूस की जाने लगी जो अश्वेत स्त्रियों से जुड़े मुद्दों को प्रकाश में लाए। इसी की परिणति 'अश्वेत नारीवादी आंदोलन के रूप में हुई । जब हम वर्तमान के अश्वेत नारीवाद की बात करते हैं तो हमें यह जान लेना चाहिए कि यह राजनीतिक/सामाजिक आंदोलन 1970 के दशक में अफ्रीकी-अमेरीका स्त्रियों द्वारा चलाया जाने वाला नारीवादी आंदोलन था।
इससे पूर्व तक अश्वेत स्त्रियों पर होने वाले शोषणों और अत्याचारों के मुद्दों को श्वेत स्त्रीवादियों अथवा नागरिक अधिकार आंदोलनों द्वारा नहीं उठाया गया था। यही कारण था कि उन्होंने श्वेत नारीवादी आंदोलन को अभिजात्यता का विमर्श बताते हुए इन पर नस्ल (रंग) के मुद्दे को शामिल नहीं किए जाने का आरोप लगाया और इससे इतर अपनी एक अलग राह बनाई। अश्वेत नारीवादी आंदोलन की आधारभूमि तैयार करने में एलिस वॉकर' के 'वुमनिज्म के सिद्धांत का भी महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने बताया कि अश्वेत नारीवादी, चुनौती स्वीकार करने वाले, साहसी, दृढसंकल्पी, स्वावलंबी और ज़िम्मेदार होते हैं तथा सभी प्रकार के नारीत्व गुणों का सम्मान करते हुए स्त्री और पुरुष दोनों के जीवन के लिए प्रतिबद्ध होते हैं।'
अश्वेत स्त्रीवादियों ने केवल वर्ग, नस्ल और लिंग के आधार पर होने वाले शोषण की ही आलोचना नहीं की, बल्कि उन्होंने अश्वेत समाज की पितृसत्तात्मक संरचना पर भी प्रहार किया। उन्होंने बताया कि वर्गीय, नस्लीय तथा लैंगिक शोषण एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। अश्वेत स्त्रीवादियों ने अश्वेत स्त्रियों के विभिन्न स्तरों पर होने वाले सामाजिक/आर्थिक/लैंगिक शोषणों के साथ-साथ दास प्रथा की भी आलोचना की है। पेट्रीशिया हिल कॉलिन्स के शब्दों में कहा जाए तो अश्वेत नारीवाद स्व-चेतन संघर्ष की एक प्रक्रिया है, जो स्त्री और पुरुष को समाज के मानवतावादी नज़रिए से साक्षात्कार कराता है।' समकालीन अश्वेत स्त्रीवादियों में हेजेल कार्बी, केथी कोहेन, पेट्रीशिया हिल कॉलिन्स, किम्बर्ले क्रेनशॉ, एंजेला डेविस, बेल हुक्स, जॉय ए जेम्स, नेल इरविन पेंटर, बारबरा स्मिथ, मिशेल वालेस, पेट्रीशिया जे. विलियम्स आदि का नाम लिया जा सकता है।
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