वित्तीय प्रबंधन की अवधारणा - concept of financial management

वित्तीय प्रबंधन की अवधारणा - concept of financial management

किसी भी उद्योगों एवं व्यवसायों में अन्यि प्रबंधों से अधिक वित्तीय प्रबंध को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। क्योंकी व्यवसाय के अन्य सभी प्रबंधों को का वित्तीय प्रबंध मुख्यत केन्द्र बिंदु होता है। वित्तीय प्रबंध को रोकना या समाप्ती करना संभव नहीं है। ऐसा करने पर सपूर्ण व्यवसाय को सुचारू संचालन में विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही व्यवसाय बद पड़ने की भी संभावना होती है। किसी भी उद्योगों एवं व्यवसायों को सुचारू रूप से संचालित करने हेतु आवश्यक सभी कार्यों को सम्पन्न करने के लिए रोकड एवं पूँजी की आवश्यकता होती है। इसलीए पर्याप्त पूँजी प्राप्त करने उसे समय पर उपलब्ध करने, उपलब्ध पूँजी का उचित उपयोग करने एवं पूँजी पर नियन्त्रण रखने हेतु प्रबंधकों को विभिन्न कार्य करना पड़ता है। इसे "वित्तीय प्रबंध कहते है।

वित्तीय प्रबंध का आशय है कि, उद्योग या व्यवसाय के वित्तीय मामलों का प्रबंधन है। वित्तीय प्रबंध में, उद्योग या व्यवसाय को आवश्यक जरूरत पूँजी का सुचारू प्रबंधन किया जाता है। उद्योग एवं व्यवसाय को समय-समय पर जरूरत पड़नेवाले विभिन्न पूँजी को प्राप्त करने, उस पूँजी को सही तरीक से विनीयोग करने, तथा अल्पे पूँजीकरण एवं अति पूँजीकरण से निर्माण होने वाली समस्याओं का निवारण करके पूँजीकरण का अनुचित व्यय बचाव कर उत्पाद व्यय पर नियंत्रण करने हेतु जो प्रबंध किय कार्य किये जाते है उसे वित्तीय प्रबंध संबोधित किया जाता है।


वित्तीय प्रबंध की अवधारणा स्पष्टत करने हेतु विभिन्न प्रबधन विशेषज्ञों ने परिभाषीत किया है।


कुछ मुख्य परिभाषाएँ निम्नाकित के अनुसार है। 


1 वेस्ट्न एवं ब्रिगहॅम के अनुसार "वित्तीय प्रबंध यह वित्तीय निर्णय प्रणाली का क्षेत्र है।

व्यक्तीगत हेतु एवं व्यवसाय के उद्देशों में समन्वय निर्माण करने हेतु इस प्रकार के वित्तीय निर्णय लिए जाते है।" 


2 प्रो.जे एल मॅसी के अनुसार "वित्तीय प्रबंध यह उद्योग एवं व्यवसाय के सुचारू संचालन से संबंधित प्रक्रिया है। यह प्रक्रिया उद्योग एवं व्यवसाय के सुचारू संचालन करने हेतु विभिन्न कार्य सम्पन्न करने के लिए आवश्यक पडनेवाला निधी प्राप्त करने एवं उस निधी का प्रभावील रूप से इस्तेमाल करने के लिए कार्यान्वीत रहता है।


3. जोसेफ कॅडले के अनुसार "उद्योग एवं व्यवसाय जैसे उपक्रमों में व्यय करके, उन उपक्रमों के उद्देशों को हासील किए जाने हेतु पूँजी का प्रभावी उपयोग एवं पूँजी के स्रोतों की ध्यानपूर्वक चयन करने को ही वित्तीय प्रबंध कहते है।