संप्रत्यय ,विशेषताएँ - concepts, features
संप्रत्यय ,विशेषताएँ - concepts, features
1. यह प्रतिमान भाषा सीखने में अधिक उपयोगी होता है।
2. सामान्यीकरण को बढ़ाने के लिए, तथ्यों का ज्ञान देने के लिए तथा 'क्यों' का उत्तर देने के लिए और कारण बताने के लिए इस प्रतिमान का प्रयोग नहीं किया जा सकता।
3. उदाहरणों के आधार पर जब प्रत्ययों को सीखने और समझने का प्रयास किया जाता है, तब यह प्रतिमान अधिक उपादेय होता है
4. गणित और विज्ञान के आधारभूत सिद्धांतों को सरलता तथा सुगमता से समझाने का प्रयास करता हैं यह प्रतिमान सभी विषयों के शिक्षण हेतु प्रयोग किया जाता है परंतु इसकी उपादेयता भाषा के सीखने में भाषा के संप्रत्यय-उपलब्धि प्राप्त करने में तथा भाषा-विज्ञान के क्षेत्र में अधिक पाई गई है।
अग्रिम संगठक प्रतिमान [Advance Organizer Model] :- डेविड आसु बेल ने इस प्रतिमान का विकास किया । इस प्रतिमान का आधार शाब्दिक अधिगम है तथा यह सूचना प्रक्रिया के सिद्धांत पर आधारित है। इसमें प्रत्ययों एवं तथ्यों के बोध से ज्ञान पुंज का विकास किया जाता है।
अग्रिम संगठक शिक्षण प्रतिमान के प्रमुख तत्व :
1. उद्देश्य (Focus) :- प्रत्यय तथा तथ्यों का बोध कराना तथा ज्ञानात्मक पक्ष का विकास करना होता है।
2. संरचना (Syntax) :- इसमें पाठ्यवस्तु का बोध सार्थक रूप में कराया जाता है।
प्रथम सोपान - इसमें क्रियाओं को सामान्य रूप में प्रस्तुत किया जाता है। द्वितीय सोपान इस सोपान में अमूर्त पाठ्यवस्तु के प्रत्ययों को एक क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाता है।
उदाहरण:- कोई शिक्षक शैक्षिक तकनीकी के 'अर्थ' एवं परिभाषा का शिक्षण करना चाहता है तो प्रथम सोपान में - सामान्य बातें, शिक्षा तथा उसके क्षेत्रों के संबंध में बताना। द्वितीय सोपान में उसकी परिभाषा एवं अर्थ का उल्लेख करना। इससे छात्र ज्ञान को सुगमता से सीख सकते हैं।
3. सामाजिक प्रणाली ( Social System):- आसुबेल की यह धारणा है कि अमूर्त विचारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है। जिस पाठ्यक्रम का छात्र विश्लेषण कर लेता है, उससे संबंध स्थपित करते हुए नवीन ज्ञान का बोध कराया जा सकता है। शिक्षक को अधिक क्रियाशील रहना होता है। शिक्षक छात्रों को अभिप्रेरणा भी देता है।
4. सहायक प्रणाली ( Support System) :- इसमें मूल्यांकन अनुदेशन के आधार पर किया जाता है।
उपयोग (Application):- इस प्रतिमान का प्रयोग अमूर्त पाठ्यवस्तु के शिक्षण में किया जाता है पाठ्यवस्तु के क्रमबद्ध ज्ञान के लिए यह अधिक उपयोगी प्रतिमान है। इसका प्रयोग ज्ञानात्मक पक्ष के उच्च स्तर के उद्देश्यों की प्राप्ति, समस्या समाधान तथा अधिगम हस्तांतरण के क्षेत्र में सफलतापूर्वक किया जा रहा है।
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