सीखने का निर्माणवादी परिप्रेक्ष्य - constructivist perspective of learning
सीखने का निर्माणवादी परिप्रेक्ष्य - constructivist perspective of learning
सीखने का निर्माणवादी परिप्रेक्ष्य इस बात पर जोर देता है कि बच्चा स्वयं ही जगत के ज्ञान तथा समझ का निर्माण करता है। इस ज्ञान के निमित्त का आधार उसके अनुभव तथा उन अनुभवों पर किया जानेवाला आत्मालोचन है। आधुनिक संज्ञानात्मक मनोविज्ञान मानव को उसके सामाजिक एवं भौतिक वातावरण के अन्वेषणों द्वारा अपने मन की सक्रिय रचना करनेवाले के रूप में देखता है, इस विचारधारा को निर्माणवाद के रूप में स्वीकार किया गया है। इसमें बच्चा नई सूचनाओं तथा असंगठित अनुभवों को पूर्व ज्ञान के संपर्क में संगठित करता है तथा उसका स्पष्टीकरण कर ज्ञान का निर्माण करता है। यह बाह्य जगत के परिप्रेक्ष्य में ज्ञान को निर्मित करने की विधियों पर जोर देता है। इसमें किसी पाठ या विषय-वस्तु को बच्चे के वास्तविक जगत के अनुभवों से जोड़कर पढ़ाया जाता के है जिससे बच्चा स्वयं विषय-वस्तु के अर्थ या अवधारणा का निर्माण करता है। बच्चे के द्वारा किसी वस्तु या विचार सम्बन्धी अवधारणा का स्व निर्माण ही सीखना है। इस सिद्धान्त में पढ़ाए जा रहे पाठ या विषय पर ध्यान न देकर सीखने वाले द्वारा सीखने के सम्बन्ध में किए जा रहे विचार पर जोर दिया जाता है
एवं सीखने वाले के द्वारा अपने अनुभवों के आधार पर किसी वस्तु के अर्थ के निर्माण से स्वतंत्र कोई ज्ञान नहीं होता।
बच्चे के संज्ञानात्मक विकास के विषय में जीन पियाजे का सिद्धान्त निमित्त परक सिद्धान्त भी कहलाता है। निर्माणवादी अधिगम सिद्धान्त का प्रतिपादन पियाजे के द्वारा किए गए अनुसन्धान कार्यों के आधार पर सिमोर पेपर्ट (Seymour Papert) के द्वारा किया गया था। इस सिद्धान्त के अनुसार सीखना ज्ञान का हस्तानान्तरण नहीं वरन ज्ञान का पुनर्निर्माण है। निर्माणवादी विचारकों का मत है कि सीखने की प्रक्रिया में बच्चा कोई स्लेट नहीं जिसपर ज्ञान लिखा जाय । वे अपने पूर्व निर्मित ज्ञान, विचारों तथा समझ के साथ अधिगम परिस्थितियों में आते हैं। यह पूर्व निर्मित ज्ञान कच्ची सामग्री है जिस पर वे नए ज्ञान का निर्माण करेंगे। ज्ञान कोई वस्तु नहीं जिसका हस्तानान्तरण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किया जा सके। ज्ञान का सिर्फ निर्माण संभव है। हर मनुष्य अपने ज्ञान का निर्माण अनुभवों से विकसित पूर्व ज्ञान के आधार पर करता है। विको ( Vico) ने कहा है कि मनुष्य जिस ज्ञान का निर्माण करता है उसे ही समझ सकता है। जब विद्यार्थी लगातार अपने अनुभवों पर आत्मलोचन करता है तो वह अपने विचारों में एक जटिलता पाता है और यही जटिलता उसे नए ज्ञान को पूर्व निर्मित ज्ञान के साथ समाहित करने की योग्यता प्रदान करती है।
रूस के मनोवैज्ञानिक व्यगोत्सकी (Vygotsky) ने सामाजिक निर्माणवाद का प्रतिपादन किया जो यह बताता है कि मनुष्य का अधिगम उसके सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश में घटित होता है। बच्चा सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाता है तथा उसके संज्ञानात्मक विकास में सांस्कृतिक उपकरणों (Cultural Tools) की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। निर्माणिक अधिगम सिद्धान्त की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं
1. सीखने की प्रक्रिया मानसिक प्रकृति की होती है, यह मस्तिष्क में गठित होती है तथा भौतिक गामक क्रियाएँ सीखने में सहायक होते हैं।
2. बच्चे के द्वारा किसी वस्तु के अर्थ का स्व-निर्माण ही सीखना कहलाता है।
3. बच्चा किसी विषय-वस्तु को अपने बाह्य जगत या अपने वास्तविक जीवन अनुभवों के परिप्रेक्ष्य में सीखता है।
4. बच्चा अपने भौतिक तथा सामाजिक वातावरण के साथ अंतःक्रिया करता है तथा इस अंतः क्रिया द्वारा प्राप्त अनुभवों का आत्मलोचन कर ज्ञान का निर्माण करता है।
5. सक्रिय अधिगम ( Activity based Learning), खोज अधिगम (Discovery Learning ) के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। वस्तुतः निर्माणवाद के सभी तरीके दी गयी परिस्थितयों में छात्रों के स्वतंत्र अन्वेषण को बढ़ावा देते हैं।
6. बिना किसी ज्ञान के नवीन ज्ञान का सीखना संभव नहीं होता। यानी नवीन ज्ञान का निर्माण तभी संभव है जब इसे पूर्व निर्मित ज्ञान से जोड़कर सीखा जाय।
7. सीखना सान्दर्भिक होता है यानी बच्चा जो जानता है उस सन्दर्भ में आगे सीखता है।
8. सीखना एक सामाजिक क्रिया है जहाँ बच्चा अन्य बच्चों तथा शिक्षक के साथ अपने अनुभव तथा ज्ञान को साझा कर ज्ञान का निर्माण करता है।
9. सीखने में भाषा का महत्वपूर्ण योगदान होता है।
10. सीखना क्षणिक नहीं होता वरन सार्थक अधिगम के लिए विचारों पर पुनर्विचार करने, उन्हें आजमाने तथा प्रयुक्त करने की जरुरत होती है।
11. बच्चा तभी सीखता है जब उसे सीखना आवश्यक या महत्वपूर्ण प्रतीत होता है और तभी वह सीखने या खोज की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाता है। सीखने के कारणों को जाने बिना बच्चा सीखने की प्रक्रिया में समावेशित नहीं हो सकता।
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