सतत एवं व्यापक मूल्यांकन - Continuous and Comprehensive Evaluation

सतत एवं व्यापक मूल्यांकन - Continuous and Comprehensive Evaluation


सतत और व्यापक आकलन पर आने से पहले यह समझना जरूरी है कि शिक्षण शास्त्रीय दृष्टि से आकलन बच्चों के सीखने को बेहतर बनाने के लिए काफी मददगार हो सकता है। इसके अलावा प्रबंधन वाले उद्देश्य का प्रमाण पत्र और अभिभावकों से संवाद के रूप में मदद ले सकते हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि स्कूल और व्यवस्था के स्वास्थ्य में इससे बहुत अधिक मदद मिल सकती है।


आजकल आकलन के संदर्भ में खास तरह की शब्दावली का चलन है।

इसे समझना जरूरी है। यह है: रचनात्मक (फार्मेटिव) आकलन और योगात्मक (समेटिव) आकलन। रचनात्मक आकलन का मतलब है कि जो शिक्षण के साथ-साथ चल रहा है और सीखने में बच्चे की मदद कर रहा है। यानी, हम बच्चे की पढ़ाई या प्रगति साथ-साथ देखते हैं। योगात्मक का अर्थ होता है एक निश्चित अवधि के बाद किया जाने वाला आकलन, कि अब बच्चे यहां पहुँच चुके हैं। सतत एवं व्यापक आकलन रचनात्मक प्रकृति का है। वह योगात्मक आकलन में कुछ काम तो आ सकता है, लेकिन उसकी प्रकृति वह नहीं है। योगात्मक आकलन की प्रकृति है कि इसमें बीच में कुछ नहीं होता यानी आपकी जो भी समयावधि है, छह महीने या साल भर की उसके बाद आप आकलन करते हैं। जबकि रचनात्मक आकलन रोज-रोज चलने वाली प्रक्रिया है।