निरंतर तथा व्यापक मूल्यांकन के कार्य - Continuous and Comprehensive Evaluation Tasks
निरंतर तथा व्यापक मूल्यांकन के कार्य - Continuous and Comprehensive Evaluation Tasks
• निरंतर तथा व्यापक मूल्यांकन के निम्नलिखित कार्य हैं
• यह अध्यापक को प्रभावी अध्यापन कार्यनीतियाँ बनाने में सहायता देते हैं।
• निरंतर मूल्यांकन से विद्यार्थी को प्रगति (शैक्षिक और सह शैक्षिक क्षेत्रों के संदर्भ।
• सहित क्षमता और उपलब्धि सीमा और नियमित मूल्यांकन में सहायता मिलती है।
• निरंतर मूल्यांकन से कमियों का निदान किया जा सकता है और अध्यापक विद्यार्थी की क्षमताओं, कमियों और ज़रूरतों को इससे सुनिश्चित कर सकते हैं।
• इससे अध्यापकों को तत्काल प्रतिपुष्टि मिलती है, जो यह निर्णय ले सकते हैं कि एक विशेष संकल्पना कई विद्यार्थियों या पूरी कक्षा को दोबारा पढ़ाने की ज़रूरत है या कुछ ही विद्यार्थियों को उपचारात्मक अनुदेशन की आवश्यकता है।
• निरंतर मूल्यांकन द्वारा विद्यार्थी अपनी क्षमताओं और कमियों को जान सकते हैं।
• इससे बच्चों को अपने अध्ययन का वास्तविक स्वयं मूल्यांकन करने में सहायता मिलती है।
निरंतर मूल्यांकन से समय-समय पर विद्यार्थी की उपलब्धि, अध्यापकों और माता-पिता में जागरूकता लाने में मदद मिलती है। वे उपलब्धि में आने वाली गिरावट के संभावित कारणों पर विचार कर सकते हैं और अनुदेशन के उपचारात्मक उपाय कर सकते हैं, अर्थात् कहाँ अधिक बल देने की आवश्यकता है। कई बार कुछ व्यक्तिगत कारणों से, पारिवारिक समस्याओं या समायोजन की समस्याओं से विद्यार्थी अपनी पढ़ाई की उपेक्षा करते हैं। जिसके परिणामस्वरूप उनकी उपलब्धि में इसमें अचानक गिरावट आती है। यदि अध्यापक, विद्यार्थी और माता-पिता उपलब्धि में इस अचानक आई गिरावट के बारे में जान नहीं पायेंगे और बच्चे द्वारा लम्बी अवधि तक पढ़ाई की उपेक्षा जारी रहेगी तो इसके परिणामस्वरूप उपलब्धि में कमी आएगी और बच्चे के सीखने की प्रक्रिया में स्थायी कमी आयेगी।
सीसीई का प्रमुख बल विद्यार्थियों की निरंतर वृद्धि पर है, जिसमें बौद्धिक, भावनात्मक, शारीरिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विकास सुनिश्चित किया जाए और इसलिए यह केवल विद्यार्थी की शैक्षिक उपलब्धि के मूल्यांकन तक सीमित नहीं होगा। इसमें विद्यार्थी को प्रेरित करने के साधनों के रूप में मूल्यांकन का इस्तेमाल किया जाता है ताकी कक्षा-कक्ष में सीखने में सुधार लाने के लिए फीडबैक और अनुवर्तन कार्य की व्यवस्था की जा सके तथा विद्यार्थी शिक्षण की रूपरेखा का एक व्यापक चित्र प्रस्तुत किया जा सके।
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