पूँजी के विभिन्न साधनों की लागत , पूँजी लागत का भारित औसत - Cost of various instruments of capital , weighted average of capital cost
पूँजी के विभिन्न साधनों की लागत , पूँजी लागत का भारित औसत - Cost of various instruments of capital , weighted average of capital cost
कोई भी उद्यम या कंपनी विभिन्न स्त्रोतों से पूँजी प्राप्त करती है। प्रत्येक स्त्रोत की पूँजीकी लागत अलग-अलग होती है। पूँजी प्राप्त करने के निम्न साधन हो सकते हैं
(1) पूर्वाधिकारी अंश - पूर्वाधिकारी अंशों के द्वारा प्राप्त पूँजी स्थायी आय वाली प्रतिभूतियाँ हैं। इन पर दिए जाने वाले लाभांश की दर इनके निर्गमन से पूर्व ही निश्चित हो जाती है। इनकी लागत हम इन अंशों से संबंधित लाभांश को इनके निर्गमन से प्राप्तिहोने वाल शुद्ध धनराशि से संबंध करके ज्ञात कर सकते हैं।
ऋणपत्रों या बांडों की लागत ऋण पूँजी की लागत से आशय कंपनी के द्वारा ऋणपत्रों पर पूर्व निश्चित दर से ब्याज के देने से है।
जो राशि के प्रयोगकर्ता को उस राशि के प्रयोग के लिए वहन करनी होती है। इस ब्याज की राशि को ऋण शुद्ध प्राप्ति से संबंधित करना है। शुद्ध धनराशि से आशय ऐसी धनराशि से है जिसमें से ऋण प्राप्त करने के व्ययों को घटा दिया जाता है।
(3) लाभों के पुनर्विनियोजन की लागत- सामान्यत: यह समझा जाता है कि प्रतिधारित लाभों की कोई लागत नहीं होती है। लेकिन सच यह है कि इसकी गर्भित लागत नहीं होती लेकिन इनकी अवसर लागत अवश्य होती है। इसका कारण यह है कि यदि इन लाभों को न रोककर अंशधारियों में ही लाभांश के रूप में वितरित कर दिया गया होता तो अंशधारियों की प्रतिधारित लाभों की लागत भी अलग-अलग होगी। समता पूँजी लागत की गणना तीन प्रकार से की जाती है।
(4) अल्पकालीन साख की लागत संस्था अल्पकालीन ऋण अथवा साख किसी बैंक अथवा अन्य संस्था से प्राप्त करती है उसकी भी लागत लगती है क्योंकि अल्पकालीन ऋण पर ब्याज के अलावा अन्य व्यय भी देना पड़ता है यह लागत ऋण की राशि में ऋण प्राप्त करने के लिए किए गए व्ययों को घटा कर प्राप्त शुद्ध राशि तथा ऋण पर देय ब्याज के अनुपात के रूप में निकालनी चाहिए।
(5) पूँजी की औसत लागत - पूँजी के प्रत्येक साधन की अपन-अपनी विशेषताएं एवं गुण दोष होते हैं। अत: कंपनी के प्रबंधक किसी एक ही साधन पर आवश्यकता से अधिक जोर न देकर पूँजी प्राप्ति के विभिन्न साधनों में एक अनुकूलतम संतुलन स्थापित करने का प्रयास करते हैं
जिससे कंपनी के अंशधारियों को अधिक लाभ मिल सके और आय, जोखिम तथा नियंत्रण की दृष्टि से कंपनी में उनके हितों के पूर्ववत् बनाया रखा जा सके या उनमें वृद्धि की जा सकें। उपरोक्त बातों का अध्ययन पूर्व से अर्जित लाभ की दर ( कर सहित ) 8.25% से अधिक होगी। यदि प्रस्तावित पूँजी विनियोजन पर संभावित लाभ की दर इससे कम है तो ऐसा पूँजी विनियोजन लाभदायक नहीं माना जाएगा। अतः पूँजी की औसत भारयुक्त लागत ऐसा काट बिंदु है जिसके आधार पर नवीन परियोजना में पूँजी लगाने के विषय में कंपनी के प्रबंधक सही एवं उचित निर्णय ले सकते हैं। पूँजी विनियोग के ऐसे समस्त प्रस्ताव जिनकी संभावित लाभ दर इस काट बिंदु से कम है, विचारणीय नहीं होते हैं।
पूँजी लागत का भारित औसत
पूँजी एक दुर्लभ वस्तु है जो बिना मूल्य चुकाए प्राप्त नहीं हो सकती।
प्रत्येक बचतकर्ता अपनी पूँजी का मूल्य चाहता है। अपनी पूँजी की सुरक्षा और लाभ को ध्यान में रखकर ही प्रत्येक बचतकर्ता अपनी पूँजी दूसरे को सौंपता है। कुछ विनियोजक पूँजी के मूल्य की तुलना में सुरक्षा को अधिक महत्व देते हैं तथा कुछ विनियोजक सुरक्षा की अपेक्षा पूँजी के मूल्य को अधिक महत्व देते हैं। पूँजी के विभिन्न साधनों की अपनी अपनी विशेषताएं गुण, एवं दोष होते हैं। अत: कंपनी के प्रबंध किसी एक ही साधन पर आवश्यकता से अधिक जोर न देकर पूँजी प्राप्ति के विभिन्न साधनों में एक श्रेष्ठ अनुकूलतम संतुलन स्थापित करने का प्रयास करते हैं जिससे कंपनी के अंशधारियों को अधिक लाभ मिल सके।
संस्था के प्रबंध, स्वामित्व, नियंत्रण, आय आदि अनेक तत्वों को ध्यान में रखकर विभिन्न स्रोतों से पूँजी प्राप्त करते हैं विभिन्न स्रोतों से प्राप्त पूँजी की गणना विभिन्न विधियों द्वारा की जाती हैं। अत: महत्वपूर्ण व्यावहारिक समस्या यह उत्पन्न होती है कि संस्था के संपूर्ण पूँजी ढाँचे की लागत क्या होगा?
माना ऋण-पूँजी एक सस्ता साधन है और यदि कोई कंपनी थोड़ी सी अंशपूंजी रखकर शेष आवश्यकताओं की पूर्ति ऋण-पूँजी से ही करना चाहे तो यह एक सीमा तक ही संभव हो सकता है, उससे अधिक नहीं। प्रत्येक अनुवर्ती ऋण से बढ़ता जाएगा और उत्तरोत्तर अधिक ब्याज देकर ही कंपनी आगे अतिरिक्त ऋण पूँजी प्राप्त नहीं कर सकेगी। आगे चलकर भविष्य में ऐसी स्थिति आ सकती है कि आय की तुलना में ब्याज का भार अधिक प्रतीत होने लगे। अत: व्यावहारिक रूप से कंपनी को आगे के वित्तीय ढाँचे में वित्त प्राप्ति के एक से अधिक साधनों का समावेश करना आवश्यक हो जाता है। यदि विभिन्न साधनों से उपलब्ध पूँजी की औसत संयुक्त लागत मालूम कर ली जाए तो इससे भविष्य में अतिरिक्त वित्त पूर्ति के साधन के बारे में निर्णय लेना आसान हो जाता है विनियोग निर्णय की दृष्टि से पूँजी लागतों के भारित औसत उपयोगी होते हैं। एक विनियोग अवसर की प्रत्याय दर की तुलना भारित औसत पूँजी लागत से की जाती है।
इस प्रकार भारित औसत पूँजी लागत विशिष्ट पूँजी लागत का भारित माध्यम होती है। विशिष्ट पूँजी लागतों का भारित माध्यम के उद्देश्य से फर्म में प्रयोग की जा रही विभिन्न प्रकार की पूँजी के अनुपातों का प्रयोग भार के रूप में किया जाता है। पूँजी की औसत लागत को ज्ञात करने की प्रक्रिया को निम्न चरणों द्वारा समझा जा सकता है-
क. सर्वप्रथम संस्था में प्रयुक्त समस्त पूँजी की राशि को एक मानकर उसके अनुपात में विभिन्न पूँजी मदों को भार दिया जाता है। भार देने के लिए पूँजी का पुस्तक मूल्य अथवा बाजार मूल्य में से किसी एक का प्रयोग किया जाता है।
ख. प्रत्येक पूँजी साधन की विशिष्ट लागत अलग से ज्ञात कर ली जाती है।
ग. यदि पूँजी के किसी भी समय पर कर लागत है तो कर का भी समायोजन किया जाता है।
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