लागत मात्रा लाभ सम्बन्ध अथवा सम-विच्छेद विश्लेषण - Cost-volume-profit Relationship or Break-even Analysis
लागत मात्रा लाभ सम्बन्ध अथवा सम-विच्छेद विश्लेषण - Cost-volume-profit Relationship or Break-even Analysis
वर्तमान समय में किसी संस्था द्वारा अर्जित लाभों की रकम को ही उस संस्था की सफलता का मापदण्ड माना जाता है। इसी कारण सभी सस्थाएं अपने लाभों को अधिकतम करना चाहती है। लाभों की रकम वस्तु की लागत, विक्रय मात्रा तथा विक्रय मूल्य, आदि अनेक तत्वों से प्रभावित होती है। वस्तुतः किसी वस्तु की उत्पादन मात्रा, लागत, लाभ व विक्रय मूल्य में गहरा सम्बन्ध होता है। उदाहरण के लिए लाभ बिक्री पर निर्भर करता है, विक्रय मूल्य काफी सीमा तक लागत पर निर्भर करता है एवं लागत, उत्पादन की मात्रा पर निर्भर करती है। जब एक लेखापाल उत्पादन के किसी भी स्तर पर इन तत्वों का विश्लेषण करके इनमें पारस्परिक सम्बन्ध स्थापित करता है तो उसे लागत मात्रा लाभ विश्लेषण या सम-विच्छेद विश्लेषण कहा जाता है।
वस्तुतः लागत मात्रा लाभ अथवा विच्छेद विश्लेषण किसी व्यावसायिक संस्था की विक्रय मात्रा के सम्बन्ध में उसके आगमों एवं लागतो का विश्लेषण करके विक्रय के विभिन्न स्तरों पर लाभ की स्थिति का अध्ययन करने की एक तकनीक है। संक्षेप में, लागत मात्रा लाभ सम्बन्ध को निम्नलिखित प्रकार व्यक्त किया जा सकता है
(1) उत्पादन की मात्रा एवं उत्पादन की लागत में ऋणात्मक सम्बन्ध होता है अर्थात् उत्पादन की मात्रा बढ़ने पर प्रति इकाई लागत की मात्रा कम होती है।
(2) उत्पादन की लागत एवं लाभ की मात्रा में ऋणात्मक सम्बन्ध होता है अर्थात् उत्पादन की लागत कम होने के साथ-साथ लाभ की मात्रा बढ़ती जाती है।
(3) उत्पादन की मात्रा एवं लाभ की मात्रा में धनात्मक सम्बन्ध होता है अर्थात् उत्पादन की मात्रा बढ़ने के साथ-साथ लाभ की मात्रा में भी वृद्धि होती जाती है।
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