पाठ्यक्रम की रूपरेखा - course outline
पाठ्यक्रम की रूपरेखा - course outline
पाठ्यक्रम की रूपरेखा का अर्थ पाठ्यक्रम के स्वनरूप से है। किसी आदर्श लक्ष्या की प्राप्ति हेतु पाठ्यक्रम के स्वरूप का निर्धारण या इस कार्य के लिए दिशा निर्देशन की प्रक्रिया के स्वरूप के निर्धारण को पाठ्यक्रम की रूपरेखा में सम्मिलित किया जा सकता है पाठ्यक्रम का स्वरूप शैक्षिक लक्ष्यों पर आधारित होता है। समय परिवर्तन एवं सामाजिक परिवर्तन के साथ-साथ शिक्षा के लक्ष्यों में भी परिवर्तन के साथ-साथ शिक्षा के लक्ष्यों में भी परिवर्तन होता रहता है। इसीलिए पाठ्यक्रम के स्वीरूप भी बदलते रहते हैं।
पाठ्यक्रम के स्वरूप को पाठ्यक्रम प्रतिमान भी कहा जाता है। प्रतिमान किसी वस्तु, व्यक्ति अथवा क्रिया का ऐसा परिकल्पूनात्मक या कार्यात्मक रूप होता है, जिससे उसके वास्तिवक स्ववरूप का बोध होता है। शिक्षा के उद्देश्यों, प्रक्रियाओं एवं परिस्थितियों के आधार पर पाठ्यक्रम के अनेक प्रतिमान विकसित किए गए हैं, परंतु पाठ्यक्रम का विकास शिक्षकों व अन्यि संबंधित घटकों के सहयोग से आवश्यतानुसार सामान्य, रूप में कर लिया जाता है।
इसे पाठ्यक्रम की सामान्य रूपरेखा या सामान्य प्रतिमान कहा जा सकता है। इस सामान्य हैं रूपरेखा के प्रमुख पद निम्नानुसार हैं
1. शिक्षकों एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों के समूह द्वारा पाठ्यक्रम के क्षेत्र का सर्वेक्षण तथा उपलब्ध साधनों का आकलन।
2. शैक्षिक उद्देश्यों का निर्धारण।
3. उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए उपयुक्त पाठ्यवस्तु का चयन एवं निर्माण।
4. विद्यालयों में पाठ्यवस्तु के पूर्व परीक्षण से पहले शिक्षकों द्वारा गोष्ठियों व कार्यशालयों का आयोजन।
5. पाठ्यसामग्री का कुछ विद्यालयों में पूर्व परीक्षण।
6. पाठ्यसामग्री का मूल्यांकन एवं आवश्यक संशोधन।
7. पाठ्यसामग्री का प्रकाशन एवं प्रसार ।
8. निर्मित पाठ्यसामग्री (पाठ्यचर्या) का क्रियान्वयन।
9. पाठ्यक्रम का मूल्यांकन एवं आवश्यकतानुसार संशोधन।
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