सृजनशील विद्यार्थी - creative student
सृजनशील विद्यार्थी - creative student
सृजनात्मकता का अर्थ है किसी वास्तविक कार्य की रचना अर्थात् सृजन करना जो कि समाज के लिए उचित एवं उपयोगी हो। जिसका प्रतिपादन इससे पहले किसी ने न किया हो। सृजनात्मकता सार्वभौमिक नहीं होती अपितु यह कुछ विशेष क्षेत्रों तक ही सीमित होती है। जैसे कि आइस्टीन विज्ञान के क्षेत्र में सृजनात्मक थे तथा पिकासो पेंटिंग के क्षेत्र में ही सोच पाते थे। अधिकतर हम सृजनात्मकता को कला के क्षेत्र तक सीमित रखते हैं परंतु सृजनात्मकता किसी भी क्षेत्र में हो सकती है। सामान्यतः यह माना जाता है कि जिसे किसी क्षेत्र का अधिकाधिक ज्ञान है, वही सृजनात्मक है। परंतु यह सत्य नहीं है। सृजनात्मकता के लिए ज्ञान के साथ-साथ कुछ और भी चाहिए और वह है किसी समस्या को अलग या नए तरीके से देखने की क्षमता। यह क्षमता केवल ज्ञान से नहीं अर्जित की जाती। अतः सृजनात्मकता के लिए केवल ज्ञान के साथ-साथ लोचशीलता विचारों का लगातार पुनर्गठन भी आवश्यकता है। इस प्रक्रिया के दौरान हमारी प्रेरणा, जुझारूपन तथा सामाजिक समर्थ की थी अहम् भूमिका है।
सृजनात्मक चिन्तन का तात्पर्य समस्याओं का सृजनात्मक ढंग से समाधान करने से है। समस्या समाधान के सामान्य तरीके से भिन्न, सृजनात्मक समाधान, वह समाधान होता है जिसे पहले किसी ने सोचा था, जो बिल्कुल नया हो । एक कलाकार, संगीतज्ञ, लेखक, वैज्ञानिक, खिलाड़ी कई भी सृजात्मक चिंतक हो सकता है। एक सृजनात्मक वैज्ञानिक अपनी खोज तथा सिद्धांतो के अध्ययन के लिए नए रास्तों का उपयोग करता है तथा नए समाधान तक पहुँचता है। सृजनात्मक चिन्तन में "नया” शब्द पर विशेष बल दिया जाता है। सृजनात्मक समाधान या उत्पाद, जो स्वतः स्फूर्त या वह परिश्रम तथा तैयारी जो हमारे अचेतन मन में जा चुकी है, उनकी परिणति होते हैं। इन चर्चा के आधार पर कह सकते हैं की रचनात्मकता का विशेषगुण जिन विद्यार्थियों में पाये जाते है उसे हम रचनाशील विद्यार्थी कह सकते है। रचनात्मक विद्यार्थी से तात्पर्य उन विद्यार्थी से होता है जो मौलिक चिन्तन के धनी होते है और जिनमें मौलिक रचना करने और उत्पादन करने की क्षमता होती है। इनमें एक विशेषता यह भी होती है कि ये किसी समस्या का समाधान परम्परागत विधियों से न करके नई विधियों से करते है। यह देखा गया है कि अधिकतर प्रतिभाशाली विद्यार्थियों में रचनाशीलता होती है लेकिन इसके अपवाद भी होते है। दूसरी तरफ कुछ गैर प्रतिभाशाली विद्यार्थियों में रचनाशीलता होती है। अतः रचनाशील विद्यार्थी को शिक्षा पर अलग से विचार करना आवश्यक है।
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