सामाजिक विज्ञान के पाठ्यपुस्तकों का आलोचनात्मक अध्ययन - Critical Study of Social Science Textbooks
सामाजिक विज्ञान के पाठ्यपुस्तकों का आलोचनात्मक अध्ययन - Critical Study of Social Science Textbooks
सामाजिक विज्ञान के शिक्षकों को अपने विद्यार्थियों में तथ्यों को लेकर एक आलोचनात्मक समझ को विकसित करना है। पाठ्यपुस्तकों के प्रति विद्यार्थियों के अन्दर एक ऐसी समझ का विकास करना है कि पाठ्य-पुस्तकें ज्ञान का एक स्रोत है न कि उसमें लिखा ज्ञान अंतिम ज्ञान है। विद्यार्थियों को पाठ्य पुस्तकों में कुछ ऐसी गतिविधि करवानी चाहिए, जिससे वे पाठ्य पुस्तकों को एक आलोचनात्मक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास करें। उदाहरण के लिए किसी भी पाठ में विद्यार्थियों से उसके जेंडर, भाषा, समुदाय व क्षेत्र की संवेदनशीलता को जांचने के लिए प्रेरित कर सकते हैं जिससे उनके अन्दर एक आलोचनात्मक समझ का विकास होगा।
सामाजिक विज्ञान शिक्षण पाठ्यपुस्तक की आवश्यकता
सामाजिक विज्ञान शिक्षण में भूगोल, अर्थशास्त्र, नागरिकशास्त्र, इतिहास आदि विषय सामाजिक विज्ञान शिक्षण में सम्मिलित है। सामाजिक विज्ञान शिक्षण मानवीय सम्बन्ध का आधारशील विषय है। शैक्षिक अनुसन्धान विश्वकोश के अनुसार, "किसी के लिए यह निश्चय करना उचित नहीं है कि सामाजिक अध्ययन इतिहास, भूगोल तथा नागरिकशास्त्र का गणितीय योग मात्र है। निश्चय ही यह इन विषयों से पर्याप्त सामग्री प्राप्त करता है, परन्तु उसी सामग्री को ग्रहण करता है जो मानव के वर्तमान तथा दैनिक जीवन के सम्बन्धों को स्पष्ट करती है। ........यह सावधानीपूर्वक नोट किया जाना चाहिए की इसका स्वरूप परम्परागत विषय जैसा नहीं है, वरन् एक क्षेत्र सा है।" सामाजिक अध्ययन शिक्षण में आधुनिक समस्याओं, अंतरराष्ट्रीय सम्बन्ध, नागरिकता की शिक्षा, विवादास्पद मामले, तत्कालीन घटनाओं तथा समसामयिक मामलों को भी स्थान प्रदान किया है। सामाजिक अध्ययन शिक्षण का क्षेत्र व्यापक है। निकलसन तथा राईट के अनुसार, "वस्तुतः इसका क्षेत्र अत्यन्त व्यापक है और सम्पूर्ण विश्व में मानव का वर्तमान सामाजिक जीवन ही इसका मूल है।"
वार्तालाप में शामिल हों