शुद्ध वर्तमान मूल्य विधि की आलोचना - Criticism of Net Present Value Method
शुद्ध वर्तमान मूल्य विधि की आलोचना - Criticism of Net Present Value Method
इस विधि की आलोचना निम्न बिंदुओं पर की जाती है -
1. यह पद्धति समझने में तथा प्रयोग करने में प्रेक्षाकृत कठिन है।
2. चूँकि विनियोग की जीवन अवधि का पूर्वानुमान पूर्ण शुद्धता से लगा लेना अत्यंत कठिन है, अत: यह पद्धति स्वत: ही कम महत्वपूर्ण हो जाती है।
3. यह पद्धति अनेक जटिलताओं तथा बारीकियों से भरी हुई, जिसमें स्वयं अनेक अनिश्चितताएं होती हैं, अतः अनिश्चिताओं के आधार पर लगाए गए अनुमान अनिश्चित होते हैं।
उदाहरणार्थ रोकड़ अंतरप्रवाह का अनुमान लागत एवं विक्रय अनुमान पर आधारित होता है, जबकि लागत एवं विक्रय लागत एवं विक्रय अनुमान स्वतः ही अनिश्चिताओं से भरे हुए होते है।
4. इस विधि में रोकड़ अंतरप्रवाह की गणना के लिए एक निश्चित प्रतिदान दर को आधार माना जाता है। यह प्रतिदान दर क्यों हो ? अथवा कौन-सी दर उचित होगी ? यह निर्धारित करना अपने आप में एक समस्या है।
5. यह पद्धति अन्य पद्धतियों से अच्छी है, किंतु इससे व्यवसाय की पूँजी लागत पर प्रभाव नहीं पड़ता।
आंतरिक प्रत्याय दर विधि
प्रत्याय की आंतरिक दर वह दर होती है जिससे किसी परियोजना के वार्षिक रोकड़ अंतरप्रवाहों का वर्तमान मूल्य उस परियोजना के वर्तमान मूल्य के बराबर हो जाता है।
इस विधि के प्रयोग में सर्वप्रथम परियोजना में विनियोग होने वाली राशि तथा उस परियोजना से प्राप्त होने वाले अंतरप्रवाहों का अनुमान लगाना होता है। तत्पश्चात् परियोजना से प्राप्त रोकड़ अंतरप्रवाहों का किसी दर से वर्तमान मूल्य परियोजना •की विनियोजित राशि के बराबर किया जाता है। यदि वह दर इच्छित दर या बाधा दर या कट-ऑफ रेट से अधिक होती है, तो परियोजना को स्वीकृति कर लिया जाता है, अत्याथा अस्वीकार कर दिया जाता है।
यदि बहुत-सी परियोजनाओं का मूल्यांकन किया जाता है तो अधिकतक आंतरिक प्रत्याय दर वाली परियोजनाओं को प्रथम स्थान पर, उससे कम दर वाली को दूसरे स्थान पर।
इसी क्रम में सबसे कम आंतरिक प्रत्याय दर वाली परियोजना को सबसे नीचे अंतिम स्थान पर रखा जाता है। परियोजना को ऊपर से नीचे की ओर उस समय तक स्वीकार किया जाएगा जब तक पूँजी का अवरोध नहीं है। आंतरिक प्रत्याय दर की गणना में निम्नलिखित दो विधियों का प्रयोग किया जाता है - 1. वार्षिक 2. भूल एवं सुधार विधि
1.वार्षिक विधि- प्रत्याय की आंतरिक दर ज्ञात करने हेतु निम्नलिखित दो परिस्थितियाँ हो सकती है -
1)प्रतिवर्ष रोकड़ अंतरप्रवाह की राशि समान होने पर
(2) प्रतिवर्ष रोकड़ अंतरप्रवाह की राशि असमान होने पर
(1) प्रतिवर्ष रोकड़ अंतरप्रवाह की राशि समान होने पर ऐसी स्थिति में प्रारंभिक विनियोग की राशि में रोकड़ अंतरप्रवाह की राशि का भाग दे दिया जाता है तथा प्राप्त भागफल की राशि को वार्षिकी सारणी में दिए गए मूल्य के सामने देखा जाता है। यह भागफल राशि जिस दर के अंतर्गत आती है वही आंतरिक प्रत्याय की दर होती है।
(2) रोकड़ अंतरप्रवाह की राशि प्रतिवर्ष असमान होने पर यदि वार्षिक रोकड़ अंतरप्रवाह की राशि प्रतिवर्ष असमान है, तो सर्वप्रथम सभी वर्षों की रोकड़ अंतरप्रवाहों का योग करके उसमें वर्षों की संख्या (प) का भाग देकर औसत
2) भूल एवं सुधार विधि-
इस विधि में आंतरिक प्रत्याय की दर ज्ञात करने के लिए सर्वप्रथम वार्षिक विधि के आधार पर ज्ञात अनुमानित दर को लिया जाता है तथा उस दर के आधार पर परियोजना से प्राप्त रोकड़ अंतरप्रवाहों का बट्टा करके उनका वर्तमान मूल्य ज्ञात किया जाता है और फिर उसकी प्रारंभिक विनियोग से तुलना की जाती है। यदि वर्तमान मूल्य एवं प्रारंभिक विनियोग बराबर हो जाए तो यही दर आंतरिक प्रत्याय की दर होगी। यदि परियोजना का ज्ञात किया गया रोकड़ अंतरप्रवाहों का वर्तमान मूल्य प्रारंभिक विनियोजित राशि से अधिक है तो अपेक्षाकृत ऊँची दर का प्रयोग करना चाहिए। जब तक परियोजना के अंतरप्रवाहों का वर्तमान मूल्य परियोजना की प्रारंभिक विनियोजित राशि के बराबर नहीं हो जाए तब तक भूल एवं सुधार विधि का प्रयोग करना चाहिए। जहाँ ये दोनों बराबर होंगे वही आंतरिक प्रत्याय दर ज्ञात होगी।
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