संस्कृति - culture

संस्कृति - culture


संस्कृति वह जटिल सम्पूर्णता है जो समाहित करती है ज्ञान, विश्वास, कला, मूल्य, विधि, रिवाज और बाकी सभी अन्य क्षमताऐं जो मानव एक समाज के सदस्य के रूप में अर्जित करता है। एडवर्ड बर्न टायलर। संस्कृति मानव द्वारा अर्जित सभी उपलब्धि के प्रदर्शनों की सूची में विस्तृत रूप में सारगर्भित होती है। संस्कृति या नियम और कानून की समाजशास्त्रीय विवेचना हमेशा समाज के लोगों द्वारा सांझें रूप से उपलब्धित उत्पाद फिर चाहें वह भाषा हो या कलाकृतियां, रीत-रिवाज या खान पान के तरीके, सोचने-समझने का ढंग इत्यादि हो, जब समाज ये सब उपलब्धियां एकजुट हो के स्वीकारता है वह उस देश काल व समाज की संस्कृति बन जाती है।


क्रोएबेर ने संस्कृति को दो भाग में विस्तृत किया है जिसे उन्हें ईड्रोस एवं इथोस की संज्ञा दी है। ईड्रोस संस्कृति का भौतिक हिस्सा होता है एवं इथोस संस्कृति का अभौतिक या फिर आत्मिक हिस्सा होता है।

अतः हम कह सकतें हैं की मानव व्यवहार का वह पांडित्यपूर्ण भाग है जो सीखा जाता है व उपार्जित किया जाता है समाज के साथ सामुदायिक रूप से रह के, मानव नस्ल का अभूतपूर्व हिस्सा उसकी संस्कृति है। रोबर्ट मोरिसन मैकआइवर ने संस्कृति को मानव समाज की प्राथमिक उपलब्धि माना जो कि मूल्यात्मक आध्यात्मिक व बुद्धिपरक पक्ष है व सभ्यता को गौण उपलब्धि माना जो कि तकनीकी व भौतिक अवयव है।


इन भिन्नताओं के होते हुए भी संस्कृति और सभ्यता एक दूसरे से अंत: संबद्ध हैं और एक दूसरे को प्रभावित करती हैं। सांस्कृतिक मूल्यों का स्पष्ट प्रभाव सभ्यता की प्रगति की दिशा और स्वरूप पर पड़ता है। इन मूल्यों के अनुरूप जो सभ्यता निर्मित होती है, वही समाज द्वारा ग्रहीत होती है। सभ्यता की नवीन उपलब्धियाँ भी व्यवहारों, हमारी मान्यताओं या दूसरे शब्दों में हमारी संस्कृति को प्रभावित करती रहती है। समन्वयन की प्रक्रिया अनवरत चलती रहती है।