भारत में लड़कियों की शिक्षा की वर्तमान स्थिति एवं चुनौतियाँ - Current status and challenges of girls' education in India
भारत में लड़कियों की शिक्षा की वर्तमान स्थिति एवं चुनौतियाँ - Current status and challenges of girls' education in India
1947 में स्वाधीनता प्राप्त करने के उपरांत महिलाओं की सामाजिक तथा शैक्षिक स्थिति में अनेक क्रांतिकारी परिवर्तन हुए। अज्ञानता, परतंत्रता, रूढ़िवादिता तथा असहायता के बंधनों से मुक्त होकर भारतीय महिलाएँ आज एक सम्मानजनक जीवन जी रहीं हैं। महिलाओं के प्रति पुरुषों के दृष्टिकोण में परिवर्तन आ रहा है। महिलाओं से संबंधित सामाजिक मान्यताएँ बदल रहीं हैं। भारतीय संविधान में पुरुषों तथा महिलाओं को पूर्णरूपेण समान दर्जा देते हुए शिक्षा के प्रसार पर बल दिया गया है। स्वतंत्रता के उपरांत महिला शिक्षा के मार्ग में आने वाली बाधाओं को जानने तथा उनका समाधान प्रस्तुत करने हेतु अनेक समितियों व आयोग का गठन किया गया। 1958 में गठित दुर्गाबाई देशमुख समिति तथा 1962 में गठित हंसा मेहता समिति के द्वारा भी महिला शिक्षा के प्रचार-प्रसार से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए गए थे । कोठारी आयोग (1964-1966) ने भी महिला शिक्षा के प्रचार व प्रसार के लिए अनेक महत्वपूर्ण सुझाव अपने प्रतिवेदन में दिए हैं। 1986 में घोषित नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी महिला शिक्षा को प्रोत्साहित करने की दिशा में क्रांतिकारी परिवर्तन लाए जाने का संकल्प दोहराया गया है।
वार्तालाप में शामिल हों