दलित नारीवाद की समीक्षा - Dalit Feminism Review

दलित नारीवाद की समीक्षा - Dalit Feminism Review


स्वतंत्रता के 65 वर्ष बाद भी दलित स्त्रियों की दशा में कोई खास परिवर्तन देखने को नहीं मिलता है। एक सामान्य स्त्री के बनिस्पत दलित स्त्रियों की समस्या न केवल अधिक है, बल्कि दारुण भी है, क्योंकि आज भी वह समाज के सबसे वंचित और उत्पीड़ित तबके से आती है। लेकिन इन सबके बावजूद भी दलित नारीवादी आंदोलन ने दलित स्त्री के भीतर एक आत्मविश्वास और चेतना का भाव जरूर पैदा किया है, जिसके कारण ये अपने अधिकारों और रचनात्मक अभिव्यक्तियों को समाज के सामने लाने का कार्य कर रही हैं। इस कड़ी में दलित स्त्री आत्मकथाओं का काफी महत्व है, जिसमें बेबी कांबले की 'जीणं आमुचं' (जीवन हमारा ), कौशल्या बैसंत्री की दोहरा अभिशाप' तथा सुशीला टाकभौरे की शिकंजे का दर्द आदि का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है। दलित स्त्री आत्मकथाएं विभिन्न भारतीय भाषाओं में निरंतर लिखी जा रहीं हैं, इनमें बामा की 'कोरक्कू' (तमिल) और बेबी कांबले की जीणं आमुचं' (मराठी) में हैं। इन आत्मकथाओं के माध्यम से इन्होंने एक दलित स्त्री पर पितृसत्ता, धर्मसत्ता, जातिसत्ता तथा रूढ़िवादी व्यवस्था के अनेक रूपों द्वारा किए जाने शोषण के विभिन्न रूपों को परत दर परत उघाड़ने का कार्य किया है।


दलित नारीवादी आंदोलन ने अपना शुरुआती चरण पूरा कर लिया है और इसे व्यापक स्तर पर पहचान भी मिल चुकी है। हालांकि इसमें कहीं-कहीं अंतर्विरोध भी भी है और इसकी वैचारिकी में विकास की गुंजाइश भी है। आज पूंजीवाद और बाजारवाद के समय में शोषण के नए स्वरूपों की पड़ताल करते हुए दलित नारीवादी आंदोलन को उसके खिलाफ सजग होने के साथ-साथ इस आंदोलन को जीवन के आधारभूत मुद्दों से जोड़ते हुए संघर्ष करने की आवश्यकता है। अभी भी इसे कई सवालों से टकराना बाकी है। इन सवालों में दलित स्त्रियों की जीविका के साधन, बराबर काम के घंटे, समान मजदूरी का सवाल, स्वास्थ्य एवं सफाई, उचित अवकाश की व्यवस्था, शोषण और हिंसामुक्त परिवार के साथ-साथ समान प्रतिनिधित्व व समुचित भागीदारी का सवाल बहुत महत्वपूर्ण है। ये मुद्दे दलित या स्त्री तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इसके सरोकार व्यापक हैं। इन व्यापक लक्ष्यों और एक समतावादी समाज की स्थापना के लिए दलित नारीवाद को विभिन्न अधिकार आंदोलनों, संघर्षरत संगठनों के साथ मिलकर एक साझे मंच से इस आंदोलन को और गति देने की जरूरत है।