शैक्षिक तकनीकी की परिभाषाएँ - Definitions of Educational Technology

शैक्षिक तकनीकी की परिभाषाएँ - Definitions of Educational Technology


शिब के. मित्रा (Shib K. Mitra) के अनुसार शैक्षिक तकनीकी को उन पद्धतियों एवं प्रविधियों का विज्ञान माना जाता है जिनके द्वारा शैक्षिक उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सकता है।


ई.ई. हेडेन (E.E. Hadden) के अनुसार यह शिक्षा सिद्धांत तथा व्यवहार की वह शाखा है जिसका संबंध मुख्यतः उन रूपरेखाओं तथा सूचनाओं से होता है जो सीखने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। ताक्षी सकमोतो (Takashi Sakamoto) के अनुसार- शैक्षिक तकनीकी एक प्रायोगिक अध्ययन है जिसका ध्येय शिक्षा के उद्देश्यों, पाठ्यवस्तु, वातावरण, व्यवहार तथा शिक्षक छात्र संबंधों को नियंत्रित करके शैक्षिक प्रभाव को बढ़ाना है।


बी. सी. मेथिस (B.C. Mathis) के अनुसार- शैक्षिक तकनीकी से अभिप्राय विद्यालय में रूपरेखा तैयार करने, संचालन करने तथा परीक्षण के लिए व्यवस्थित प्रविधियों तथा व्यावहारिक ज्ञान के विकास से है।


उन्विन (Unwin) के अनुसार- शैक्षिक तकनीकी से अभिप्राय शिक्षा तथा प्रशिक्षण की आवश्यकता को पूरा करने हेतु आधुनिक कौशल एवं प्रविधियों का अनुप्रयोग है। यह सीखने की प्रक्रिया को विभिन्न साधनों एवं उपकरणों के अनप्रयोग तथा वातावरण के नियंत्रण द्वारा सुगम बनाता है। रोबर्ट ए. कॉक्स (Robert A. Cox) के अनुसार- शैक्षिक तकनीकी वैज्ञानिक प्रक्रिया का मनुष्य के सीखने की दशाओं में उपयोग है।


जी.ओ.लीथ (G.O.Leith) के अनुसार शैक्षिक तकनीकी अधिगम तथा अधिगम की दशाओं में वैज्ञानिक ज्ञान का प्रयोग है जिसके द्वारा शिक्षण एवं प्रशिक्षण की कुशलता एवं प्रभावकारिता को उत्तम बनाया जा सकता है।


एस. एस. कुलकर्णी ( S.S. Kulkarni ) के अनुसार- तकनीकी एवं विज्ञान के सिद्धांतों एवं आविष्कारों का शिक्षा की प्रक्रिया में उपयोग शैक्षिक तकनीकी कहलाता है।


उपरोक्त परिभाषाओं से शैक्षिक तकनीकी के निम्नलिखित तीन अर्थ सामने आते हैं।


1. शैक्षिक उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु प्रविधियों व पद्धतियों का विज्ञान 


शैक्षिक तकनीकी उन सभी प्रविधियों एवं युक्तियों का विज्ञान है जिसे शैक्षिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए व्यवहार में लाया जा सकता है।

यह अधिगम उद्देश्यों या अधिगम उपलब्धियों के निर्धारण तथा उन्हें व्यावहारिक पक्ष में लिखने में सहायता प्रदान करता है। यह उन सभी प्रक्रमों या गतिविधियों को उपयोग में लाने का प्रयास करता है जिससे इन अधिगम उपलब्धियों की पूर्ति की जा सके। इसके अंतर्गत किसी भी शैक्षिक उद्देश्य की पूर्ति हेतु अदा (input) से लेकर प्रदा (Output) तक कार्यशील विभिन्न अवयवों का पता लगाया जाता है, इन अवयवों का निष्पादन किया जाता है, उनके निष्पादन के प्रभावों का निरीक्षण किया जाता है तथा इन प्रभावों को अभ्यासकर्ता द्वारा उपयोग में लाये जाने के लिए निर्देशिका का विकास किया जाता है


2. शैक्षिक प्रक्रिया का यंत्रीकरण


शैक्षिक तकनीकी शैक्षिक प्रक्रिया का यंत्रीकरण है, जिसमें मानव ज्ञान के तीन स्तरों में भौतिकीय विज्ञान एवं तकनीकी के साधनों का उपयोग किया जाता है।


ज्ञान का संरक्षण: ज्ञान के संरक्षण के लिए टेप रिकॉर्डर, वीडियो रिकॉर्डर, फोटोग्राफ आदि का उपयोग किया जाता है। उदाहरण स्वरूप किसी महान शिक्षक या शिक्षाविद के व्याख्यान या प्रस्तुतीकरण को उसके मृत्यु के बाद भी आने वाली पीढ़ी के उपयोग के लिए संरक्षित रखा जाता है। ज्ञान का प्रसारः ज्ञान के प्रसार के लिए दूरदर्शन, रेडियो, इन्टरनेट, टेलीकांफरेंसिंग आदि का प्रयोग किया जाता है। मुक्त विद्यालय, मुक्त विश्वविद्यालय, पत्राचार शिक्षा ज्ञान के प्रसार के लिए इन साधनों को व्यवहार में लाता है। ज्ञान का विकास: कंप्यूटर के विभिन्न एप्लीकेशन सॉफ्टवेर के द्वारा तथ्यों का सारणीकरण एवं विश्लेषण आसानी से किया जाता है तथा इससे अधिक विश्वसनीय परिणाम प्राप्त होते हैं।


3. शिक्षा में वैज्ञानिक सिद्धांतों का अनुप्रयोग


शैक्षिक तकनीकी का आधार विज्ञान है। शिक्षा की प्रक्रिया को वैज्ञानिक सिद्धांतो की सहायता से अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता है।

यह शिक्षा की समस्या को सुलझाने के लिए वैज्ञानिक प्रक्रिया की तरह विश्लेषणात्मक अध्ययन का सहारा लेती है । यह रचनात्मक शैक्षिक तकनीकी ( Constructivist Educational Technology) (सिल्वरमेन, 1968) भी कहलाता है क्योंकि यह अधिगम के विज्ञान को शिक्षण की कला के साथ जोड़ता है। इसे शिक्षा के विज्ञान के रूप में देखा जा सकता है। इसमें शैक्षिक समस्या का वैज्ञानिक प्रक्रिया द्वारा विश्लेषण किया जाता है। यह किसी भी शैक्षिक चर के आकलन के लिए आकलन उपकरणों के चयन तथा रचना में सहायता प्रदान करता है। यह अधिगम उद्देश्यों के अनुरूप शिक्षण युक्तियों तथा अधिगम गतिविधियों के चयन में भी सहायता प्रदान करता है। यह सापेक्षिक तकनीकी (Relative Technology) भी कहलाता है क्योंकि यह भौतिकी विज्ञान तथा व्यवहार विज्ञान के सिद्धांतों का उपयोग शैक्षिक समस्याओं के समाधान हेतु करता है