शिक्षण की परिभाषाएँ - definitions of teaching
शिक्षण की परिभाषाएँ - definitions of teaching
बी. ओ. स्मिथ के अनुसार - "शिक्षण एक ऐसे कार्य की व्यवस्था है जिसमें एक अभिकर्ता, लक्ष्य तथा परिस्थिति निहित होती है। यह परिस्थिति दो प्रकार के कारकों से मिलकर बनती है। प्रथम-ऐसे कारक जिन पर अभिकर्ता का कोई नियंत्रण नहीं होता (जैसे- वर्ग का आकर कक्षा का आकार, विद्यार्थियों की शारीरिक विशेषताएँ आदि) तथा द्वितीय वे अन्य कारक जिन्हें अभिकर्ता तबदील कर सकता है (जैसे-प्रश्न पूछने का ढंग सूचनाओं या उपलब्ध विचारों को संचारित करने की विधि आदि)।"
इजराइल शैफलर के अनुसार - "शिक्षण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य अधिगम की प्राप्त कराना है और जिसका सम्पादन ऐसे ढंग से होता है जिसमें शिक्षार्थी की बौद्धिक सत्यनिष्ठा एवं स्वतंत्र ढंग से निर्णय लेने की क्षमता के प्रति सम्मान का भाव निहित रहता है।"
रोनाल्ड टी. हाइमन के अनुसार - "शिक्षक को केवल शिक्षण उद्देश्य की जानकारी होना ही आवश्यक नहीं बल्कि उसका अपने विद्यार्थियों तथा विषयवस्तु से संबंध तथा विद्यार्थियों एवं विषयवस्तु के मध्य बनने वाले संबंधों का भी परिज्ञान आवश्यक है।"
स्पष्ट है कि शिक्षण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें शिक्षक अपने शिक्षार्थियों के साथ संपर्क स्थापित कर शिक्षण उद्देश्यों को पूरा करने के लिए उन्हें विभिन्न अधिगम अनुभवों या परिस्थितियों के साथ संलग्न करता है तथा उन्हें पहल करते हुए इन परिस्थितियों को ढूंढने तथा परखने की स्वायत्तता प्रदान करता है । शिक्षण कार्य कई क्रियाओं का समन्वयन है जिसमें विषय-वस्तु का विश्लेषण, अधिगम उद्देश्यों का निर्धारण, शिक्षण युक्तियों का चयन, विषय वस्तु की प्रस्तुति एवं स्पष्टीकरण, प्रश्न पूछना, शिक्षार्थियों को अभिप्रेरित करना, उनके उत्तरों का पुनर्बलन एवं पृष्ठपोषण तथा मूल्यांकन क्रियाएँ आती हैं।
शिक्षण को एक कला तथा विज्ञान दोनों रूपों में देखा जाता है। एक कला के रूप में यह शिक्षण क्रिया के संपादन की शैली से संबंधित है। वहीं शिक्षण क्रिया के विश्लेषण एवं मूल्यांकन तथा इसमें निहित चरों एवं कौशलों के आधार पर इसमें सुधार लाने के दृष्टिकोण से यह एक विज्ञान है।
शिक्षण व्यवस्था में कई चर निहित होते हैं तथा उनके बीच पारस्परिक संबंध होता है। ये चर कई प्रकार के में होते हैं- शिक्षक से संबंधित चर शिक्षार्थी से संबंधित चर, विषय-वस्तु से संबंधित चर सामाजिक परिस्थिति से संबंधित चर, शिक्षण-अधिगम परिस्थिति से संबंधित चर तथा अधिगम उद्देश्यों से संबंधित चर शिक्षक से संबंधित चरों में शिक्षक की शैक्षिक एवं व्यावसायिक योग्यता, व्यक्तित्व एवं बुद्धि से जुड़ी विशेषताएँ आती हैं। शिक्षार्थी से जुड़े चरों में शिक्षार्थी का बौद्धिक स्तर, अभिक्षमताएँ, शैक्षिक उपलब्धि तथा व्यक्तित्व संबंधी विशेषताएँ सम्मिलित होती हैं।
विषय-वस्तु से जुड़े चरों में विषय-वस्तु की प्रकृति एवं भाषा तथा इससे संबंधित अनुभव एवं अभ्यास आदि आते हैं। शिक्षण-अधिगम परिस्थिति से जुड़े चर में शिक्षक एवं शिक्षार्थी संबंध कक्षा की स्थिति तथा कक्षा का भौतिक वातावरण आदि सम्मिलित होते हैं। सामाजिक परिस्थिति से संबंधित चर में शिक्षक एवं शिक्षार्थी की सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि तथा अनुभव सम्मिलित होते हैं जो कक्षा के शिक्षण वातावरण को विशेष रूप से प्रभावित करते हैं । अधिगम से संबंधित चरों में अधिगम उदेश्य आते हैं तथा संपूर्ण शिक्षण प्रक्रिया शिक्षार्थियों द्वारा इन उद्देश्यों को प्राप्ति में लगी रहती है।
अनुकूलन, प्रशिक्षण, मतारोपण एवं अनुदेशन कई ऐसे प्रत्यय हैं जो शिक्षण के समतुल्य प्रतीत होते हैं किन्तु स्वभाव की दृष्टि से शिक्षण से भिन्न हैं। थॉमस एफ. ग्रीन ने अपनी पुस्तक दी एक्टिविटीज ऑफ़ टीचिंग' में बताया है कि शिक्षण कुछ अर्थ में अनुकूलन के रूप में, कुछ प्रशिक्षण के रूप में, कुछ मतारोपण तथा कुछ अनुदेशन के रूप में प्रतीत होता हैं किन्तु ये एक-दूसरे से भिन्न हैं।
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