सीमावर्ती लागत-पद्धति के दोष या हानियां - Demerits or Disadvantages of Marginal Costing

सीमावर्ती लागत-पद्धति के दोष या हानियां - Demerits or Disadvantages of Marginal Costing


कुछ विद्वानों ने सीमावर्ती लागत पद्धति की आलोचना करते हुए इसके दोषों पर प्रकाश डाला है। यद्यपि तथाकथित दोष इस पद्धति की सीमाएं हैं फिर भी इन दोषों पर प्रकाश डाला गया है। संक्षेप में, इस पद्धति के निम्न दोष बताये गये हैं: 


(i) यह पद्धति विक्रय क्रिया पर अधिक जोर देती है, जबकि व्यावसायिक क्षमता की दृष्टि से उत्पादन व विक्रय दोनों क्रियाएं समान महत्व रखती हैं।


(ii) स्कन्ध का केवल सीमान्त लागत के आधार पर मूल्यांकन वित्तीय प्रबन्धक की दृष्टि से कम माना जा सकता है और इसके कारण कार्यशील पूंजी की समस्या उत्पन्न हो सकती है।


(iii) दीर्घकालीन मूल्य नीति निर्धारण में यह असफल है।


(iv) बाह्य व्यक्तियों (विशेषकर कर अधिकारी) के रिपोर्टिंग में यह पद्धति उपयुक्त नहीं है। 


(v) यह पद्धति समय-कारक को उचित महत्व नहीं प्रदान करती है।