व्यावसाय का विकास विस्तावर करने , दो व्यावसायों का एकत्रीकरण तथा संविलयन करने - Developing business, expanding, merging and merging two businesses
व्यावसाय का विकास विस्तावर करने , दो व्यावसायों का एकत्रीकरण तथा संविलयन करने - Developing business, expanding, merging and merging two businesses
चालू व्यावसाय का विकास करने के लिए या व्यावसाय का विस्तार करने हेतु व्यावसाय में अधिक पूजी की आवश्यवकता होती है। व्यासवसाय के विकास स्तसर एवं विस्ताकर का क्षेत्र को मददे नजर रखते हुए अधिक्यव पूंजी की मांग सुनिश्चित कर व्याहवसाय में पूंजीकरण की प्रक्रिया कार्यान्वीवत कर आवश्यक पूंजी पूंजीकरण के द्वारा प्राप्तश की जाती है।
दो व्यावसायों का एकत्रीकरण तथा संविलयन करने
दो व्यावसायोका एकत्रीकरण करने के लिए पूजी की पुनर्रचना की जाती है। उसी प्रकार दो व्यावसायों का परस्त्र एकमेक में संविलयन करने हेतु पूंजी की पुनर्रचना की जाती है। इस दोनो स्थिती में पूजीकरण की प्रक्रिया कार्यान्वीत की जाती है।
व्यावसाय के पुनर्संघटन करने
पूराने व्यावसाय का पुनर्संघटन कर व्यावसाय के स्वरूप एवं प्रकृती में बदल करने का प्रयास करते समय पूराने पूंजी सरंचना का कोई खास उपयोग नही होता, इसलिए व्यावसाय के पूर्नसंघटन करते समय पूर्नसंघटीत व्यावसाय में पूजी की मांग के अनुसार पूंजीकरण की प्रक्रिया का निर्वाहन किया जाता है।
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