संवाद - Dialogue

संवाद - Dialogue


जान प्राप्त करने के विभिन्न साधनों में संवाद का अपना विशिष्ट और महत्वपूर्ण स्थान है। यह शिक्षा के क्षेत्र में विशेष रूप से गतिशील है जिसमें किसी चिन्तनशील विषय पर आपसी विचार-विमर्श तब तक निरन्तर बना रहता है जब तक संबाद में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागी सामूहिक रूप से एक सामान्य निष्कर्ष तक नहीं पहुंच जाते। संवाद का सम्बन्ध मूलरूप से दर्शनशास्त्र की जान मीमांसा शाखा की बुद्धिवादी अथवा संज्ञानवादी परपरा से है। इसके अन्तर्गत यह मानकर चला जाता है कि मनुष्य केवल एक कोरी स्लेटन होकर एक पूर्व नियोजित बुद्धि वाला चिंतनशील व चेतनप्राणी है जो अपने अनुभवों आदि के आधार पर भाषा का प्रयोग करते हु मैं अपना पक्ष रख सकता है बुनियादी तौर पर मौखिक प्रक्रिया होने के कारण संबाद में भाषा के रचनात्मक प्रयोग का अच्छा अवसर प्राप्त होता है। संबाद पद्धति का मूलआधार इस तथ्य में है कि मनुष्य में विचारात्मक भिन्नताएँ होते हुये भी उनमें ऐसी सामान्यताओं को दूढ़ा सकता है जिन पर सभी एकमत हो सके। इस शैली का सम्बन्ध विभिन्न व्यक्तियों के भिन्न-भिन्न अनुभवों पर निर्मित धारणाओं अथवा विचारों से है।

प्रारंभिक तौर पर इन धारणाओं के प्रति संदेह प्रकट किया जाता है. इस संदेह के आधार पर भिन्न-भिन्न प्रकार से इनकी परीक्षा कर निष्कर्ष तक पहुंचने का प्रयास किया जाता है। भिन्न-भिन्न अनुभवों के आधार पर सामान्यीकरण करने का प्रयास किया जाता है ताकि इसे सिद्धान्त का रूप दिया जा सके। पुनः यह सिद्धान्त भी संदेह की श्रेणी में आकर संवाद को निरन्तरता प्रदान करता है। संवाद की यह प्रक्रिया उपयुक्त व्याबहारिक उदाहरणों पर आश्रित रहती है जिससे विभिन्न विचारों को सरलता से समझा जा सके। प्रश्नों के माध्यम से नवीन चिन्तन के प्रति प्रोत्साहन इसका विशिष्ट प्रयोजन रहता है। अतः प्रश्नों में निपुणता इसका मूल आधार है। दैनिक जीवन मैं इसका सम्बन्ध जोड़ते हुये माना गया है कि संबाद का महत्व जीवन में दिन-प्रतिदिन अनुभव की जाने वाली समस्याओं के विभिन्न आयामों को समझने से जुड़ा है। संबाद का उपयोग हमारे भीतरी संसार की जटिलताओं, कष्टों तथा जीवन की खुशियों की मानसिक अनुभूति की अभिव्यक्ति के साधन के रूप में किया जाता है। एक पद्धति के रूप में यह स्वीकार किया गया है कि संवाद का योगदान नवीन ज्ञान की रचना की अपेक्षा अस्पष्ट एवं अविकसित ज्ञान को स्पष्ट एवं विशिष्ट अथवा स्पष्ट बनाने में निहित है।