सम-विच्छेद चार्ट के विभिन्न रूप - Different Types of B.E. Chart
सम-विच्छेद चार्ट के विभिन्न रूप - Different Types of B.E. Chart
सम-विच्छेद चार्ट समस्या विशेष के अनुरूप उचित होना चाहिये। विभिन्न प्रकार की समस्याओं के लिये सम-विच्छेद चार्ट के निम्नलिखित रूप हो सकते हैं -
(1) अंशदान सम-विच्छेद चार्ट (Contribution Break-even Chart) - क्रियाशीलता के विभिन्न स्तरों पर अंशदान की मात्रा प्रदर्शित करने के लिए अंशदान चार्ट बनाया जाता है। इस चार्ट में X- अक्ष पर पहले परिवर्तनशील लागतें दिखलाई जाती हैं और फिर परिवर्तनशील लागत रेखा के समानान्तर स्थिर लागते दिखलाई जाती हैं। शेष विधि साधारण चार्ट की भाँति ही है।
(2) लाभ विनियोजन सम-विच्छेद चार्ट (Break-even Chart showing profit appropriations) यह चार्ट लाभों के विनियोजन को रेखाचित्र पर प्रदर्शित करने के लिये बनाया जाता है। इसके बनाने की विधि साधारण सम-विच्छेद चार्ट की तरह ही है। अन्तर केवल इतना है कि इस चार्ट पर लाभों के विभिन्न मदों पर विभाजन की सूचनायें और प्रदर्शित की जाती है।
(3) रोकड़ सम-विच्छेद चार्ट (Cash Break-even Chart) - यह चार्ट उस बिन्दु को प्रदर्शित करता है जिस पर रोकड़ अन्तर्वाह (Cash inflow) और रोकड़ बहिर्वाह (Cash outflow) एक समान हो। यह चार्ट प्रबन्ध को विभिन्न स्तरों पर रोकड़ की आवश्यकता या बाहुल्यता प्रदर्शित करता है। इस चार्ट के बनाने के लिये सभी लागतों को दो भागों में विभाजित किया जाता है (1) ऐसी लागतें जिनका तुरन्त नकद भुगतान करना होता है और (2) ऐसी लागतें जिनका भुगतान नहीं करना होता है (जैसे ह्रास) या जिनका भुगतान स्थगित किया जा सकता है। जिस बिन्दु पर रोकड भुगतान चाहने वाली लागतें (out of pocket costs) विक्रय आगम के बराबर हो, वह बिन्दु रोकड सम-विच्छेद बिन्दु कहलाता है
(4) नियन्त्रण सम-विच्छेद चार्ट (Control Break-even Chart) बजटीय और वास्तविक लाभो, सम-विच्छेद बिन्दुओं और विक्रयों की तुलना करने के लिये नियन्त्रण चार्ट बहुत उपयोगी होता है।
इस चार्ट पर विक्रय और लागतों के बजटीय और वास्तविक अक दिखलाये जाते है। इन अंकों में महत्वपूर्ण अन्तर होने पर या परिवर्तनशील लागतों के अनुपात से अधिक बढ़ने पर प्रबन्ध विश्लेषण को आदेश दे सकता है।
(5) विश्लेषण सम-विच्छेद चार्ट (Analysis Break-even Chart) – यह साधारण चार्ट का एक विस्तृत रूप ही है। इसमें सभी परिवर्तनशील लागतों को सम्मिलित रूप में न दिखाकर उसके विभिन्न लागत तत्वों (जैसे प्रत्यक्ष सामग्री, प्रत्यक्ष श्रम, कारखाना, प्रशासन, विक्रय और वितरण के परिवर्तनशील व्यय) को चार्ट पर अलग-अलग दिखलाया जाता है। लाभ क्षेत्र में कर लाभांश और कोषों के लिये नियोजन को दिखलाया जा सकता है।
(6) विभिन्न वस्तुओं के लिये सम-विच्छेद चार्ट ( Break-even Chart for Various Products) - एक से अधिक वस्तुओं का उत्पादन करने वाली संस्थाओं में प्रत्येक वस्तु के लिये एक पृथक सम-विच्छेद चार्ट बनाना उनकी तुलनात्मक लाभप्रदता प्रदर्शित की जा सकती है।
ऐसी तुलना के लिये अंशदान सम-विच्छेद चार्ट सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं।
(7) अनुकूलतम उत्पादन के लिये सम-विच्छेद चार्ट (Break-even Chart of Optimum Output) – विक्रय मात्रा के एक निश्चित बिन्दु के पश्चात् वस्तु का विक्रय मूल्य गिरने लगता है। दूसरी ओर लागत वृद्धि नियम की क्रियाशीलता के कारण एक निश्चित उत्पादन बिन्दु के पश्चात् प्रति इकाई परिवर्तनशील लागत बढ़ने लगती है। अतः अधिकतम उत्पादन ही अधिकतम लाभ नहीं प्रदान कर सकता है। इसके लिए अनुकूलतम उत्पाद ज्ञात किया जाता है। इसके लिये क्रियाशीलता के विभिन्न स्तरों पर विक्रय और लागत का व्यवहार प्रदर्शित किया जाता है। चार्ट में विक्रय और कुल लागत रेखाओ के बीच अधिकतम लम्बवत् दूरी प्रदर्शित करने वाला बिना अनुकूलतम उत्पादन बिन्दु कहलाता है। इस बिन्दु पर सीमान्त लागत और सीमान्त आगम एक समान होते हैं।
(8) पूँजी सम-विच्छेद चार्ट (Capital Break-even Chart) एक व्यवसाय के लिये दो प्रकार की पूँजी की आवश्यकता होती है
(1) स्थायी पूँजी और (2) कार्यशील पूँजी इन दोनों का योग कुल विनियोजित पूँजी कहलाता है। स्थायी पूँजी की आवश्यकता व्यवसाय के लिये भूमि, भवन, संयंत्र सामग्री आदि के क्रय करने के लिये होती है तथा कार्यशील पूँजी की आवश्यकता व्यवसाय के उत्पादन तथा संचालन व्ययों को पूरा करने के लिये होती है। जैसे-जैसे उत्पादन व विक्रय कार्य बढ़ता जाता है, उसमें कार्यशील पूँजी की आवश्यकता बढ़ती जाती है। पूँजी सम-विच्छेद चार्ट का प्रयोग विभिन्न उत्पादन व विक्रय स्तरों पर आवश्यक कुल विनियोजित पूँजी की मात्रा को दिखाने तथा पूँजी की अनुकूलतम उपयोग मात्रा निर्धारित करने के लिये कहा जाता है।
इस चार्ट में सामान्य चार्ट की तरह ही स्थिर व परिवर्तनशील (कार्यशील ) पूँजी को अंकित किया जाता है तथा कुल विनियोजित पूँजी रेखा बना ली जाती है। यह रेखा सामान्य चार्ट पर दिखलायी गयी कुल लागत रेखा की भाँति ही होती है।
इसके पश्चात् सामान्य चार्ट की तरह ही एक विक्रय रेखा खींची जाती है। कुल विनियोजित पूँजी रेखा और विक्रय रेखा एक दूसरे को जिस बिन्दु पर काटती है, वही पूँजी के सर्वोत्तम उपयोग का बिन्दु होता है। इस बिन्दु से कम उत्पादन विक्रय- मात्रा पर पूँजी बेकार पड़ी रहती है तथा उसका पूर्ण उपयोग नहीं हो पाता है। इसके विपरीत इस बिन्दु से अधिक उत्पादन / विक्रय करने पर कुल विनियोजित पूँजी की कमी की समस्या बढ़ती जाती है। इस प्रकार यह चार्ट व्यवसाय के लिये पूँजी की अनुकूलतम मात्रा निर्धारित करने में सहायक होता है।
(9) स्वयं निर्माण या क्रय सम-विच्छेद चार्ट (Make or Buy Break-even Chart) बहुत बार प्रबन्धक को अपने उत्पाद के लिये आवश्यक किसी पुर्जे को अपनी ही फैक्ट्री में निर्माण करने अथवा इसे बाजार से बना बनाया क्रय करने के विकल्प के बीच निर्णय लेना होता है।
इस चार्ट की सहायता से वस्तु की वह मात्रा निर्धारित की जा सकती है जिस पर वस्तु का स्वयं निर्माण लाभप्रद रहेगा।
वस्तु को अपनी फैक्ट्री में बनाने पर दो प्रकार की लागतों (1) स्थिर तथा (2) परिवर्तनशील की आवश्यकता पड़ती है। इन दोनों लागतों का योग विनियोजन एवं निर्माण की कुल लागत (Total cost of investing and making) कहलाता है। इन दोनों प्रकार की लागतों को सामान्य सम-विच्छेद चार्ट की भाँति अंकित कर दिया जाता है तथा विनियोजन एवं निर्माण की कुल लागत रेखा (Total cost of investing and making line) खींच दी जाती है। वस्तुतः यह रेखा सामान्य चार्ट पर खींची जाने वाली कुल लागत रेखा की तरह ही होती है। इसके पश्चात् वस्तु को बाजार से क्रय करने की लागत को दिखलाने के लिये क्रय की लागत रेखा खींची जाती है। यह रेखा सामान्य चार्ट पर दिखलाये जाने वाली विक्रय आगम रेखा की तरह ही होती है। ये दोनों रेखायें एक-दूसरे को जिस बिन्दु पर काटती हैं वही सम-विच्छेद बिन्दु होता है। इस बिन्दु से कम मात्रा में वस्तु की आवश्यकता होने पर उसे बाजार से क्रय करना लाभप्रद रहता है तथा इस मात्रा से अधिक वस्तुओं की आवश्यकता होने पर इसका स्वयं निर्माण लाभप्रद रहता है।
(10) सम-विच्छेद चार्ट (Profit Chart) यह एक विशेष प्रकार का सम-विच्छेद चार्ट होता है। इसे लाभ मात्रा ग्राफ भी कहते हैं। यह चार्ट विक्रय मात्रा और लाभों के बीच सम्बन्धों को दर्शाता है।
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